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Hemorrhagic Fever: हेमोरेजिक फीवर क्या है? जानें किन कारणों से होता है और लक्षण क्या हैं

Hemorrhagic Fever Cause Hindi : इबोला वायरस एक प्रकार का वायरल हेमोरेजिक बुखार है। आइए जानते हैं इसके शुरुआती लक्षण, किन कारणों से फैलता है और बचाव के तरीके।

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भारत

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Nidhi Yadav

Jun 04, 2026

Hemorrhagic Fever Symptoms, Viral Hemorrhagic Fever Causes, Hemorrhagic Fever Prevention

तेज बुखार से पीड़ित युवती- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Hemorrhagic Fever Cause: अफ्रीकी देशों कांगो और युगांडा में इबोला वायरस के मामले बढ़ने के बाद एक बार फिर यह बीमारी चर्चा में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इसे लेकर चिंता जताई है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, इबोला एक प्रकार का वायरल हेमोरेजिक बुखार है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर हेमोरेजिक फीवर क्या होता है, इसमें बुखार कितना तेज हो सकता है और इसके लक्षण कैसे पहचानें?

डॉ. विपुल अग्रवाल (MD, Physician) के अनुसार, हेमोरेजिक फीवर कुछ ऐसे वायरस से होने वाली गंभीर बीमारियों का समूह है, जो शरीर की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) और अंगों को प्रभावित कर सकते हैं। गंभीर मामलों में शरीर के अंदर या बाहर ब्लीडिंग (खून बहना) भी हो सकती है।

हेमोरेजिक फीवर में कितना तेज होता है बुखार?

फिजिशियन के अनुसार, वायरल हेमोरेजिक फीवर में अचानक तेज बुखार आ सकता है। कई मामलों में शरीर का तापमान 101°F से 104°F (38.3°C से 40°C) या उससे ज्यादा तक पहुंच सकता है। इसके साथ मरीज को तेज कमजोरी और शरीर टूटने जैसी परेशानी महसूस हो सकती है। सिर्फ तेज बुखार होने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति को हेमोरेजिक फीवर ही है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी होती है।

वायरल हेमोरेजिक फीवर के कारण क्या हैं?

मेयो क्लिनिक के अनुसार, यह बीमारी वायरस के कारण होती है। अलग-अलग वायरस इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इबोला, डेंगू, मारबर्ग और येलो फीवर जैसे संक्रमण इसी कैटेगरी में माने जाते हैं। यह संक्रमण कई बार संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ, संक्रमित जानवरों, मच्छरों या दूषित वातावरण के संपर्क से फैल सकता है। कौन-सा वायरस है, उसके हिसाब से फैलने का तरीका बदल सकता है।

हेमोरेजिक फीवर के लक्षण क्या-क्या होते हैं?

  • तेज बुखार।
  • बहुत ज्यादा कमजोरी और थकान।
  • सिरदर्द।
  • शरीर और मांसपेशियों में दर्द।
  • गले में दर्द।
  • उल्टी और दस्त, पेट दर्द।
  • बहुत ज्यादा कमजोरी।
  • कुछ मामलों में शरीर के अंदर या बाहर ब्लीडिंग।

हेमोरेजिक फीवर से बचने के लिए क्या करें?

  • मच्छरों और टिक (किलनी) से बचें।
  • हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं।
  • बीमार व्यक्ति के संपर्क में न आएं।
  • चूहों या जंगली जानवरों के मल-मूत्र से दूरी बनाकर रखें।
  • बाहर का खुला या गंदा खाना खाने से बचें।
  • तेज बुखार, कमजोरी, उल्टी या दस्त हो तो लापरवाही न करें।
  • लक्षण दिखें तो जल्दी डॉक्टर से जांच कराएं।
  • खुद से दवा खाने की गलती न करें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।