
तेज बुखार से पीड़ित युवती- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Hemorrhagic Fever Cause: अफ्रीकी देशों कांगो और युगांडा में इबोला वायरस के मामले बढ़ने के बाद एक बार फिर यह बीमारी चर्चा में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इसे लेकर चिंता जताई है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, इबोला एक प्रकार का वायरल हेमोरेजिक बुखार है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर हेमोरेजिक फीवर क्या होता है, इसमें बुखार कितना तेज हो सकता है और इसके लक्षण कैसे पहचानें?
डॉ. विपुल अग्रवाल (MD, Physician) के अनुसार, हेमोरेजिक फीवर कुछ ऐसे वायरस से होने वाली गंभीर बीमारियों का समूह है, जो शरीर की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) और अंगों को प्रभावित कर सकते हैं। गंभीर मामलों में शरीर के अंदर या बाहर ब्लीडिंग (खून बहना) भी हो सकती है।
फिजिशियन के अनुसार, वायरल हेमोरेजिक फीवर में अचानक तेज बुखार आ सकता है। कई मामलों में शरीर का तापमान 101°F से 104°F (38.3°C से 40°C) या उससे ज्यादा तक पहुंच सकता है। इसके साथ मरीज को तेज कमजोरी और शरीर टूटने जैसी परेशानी महसूस हो सकती है। सिर्फ तेज बुखार होने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति को हेमोरेजिक फीवर ही है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी होती है।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, यह बीमारी वायरस के कारण होती है। अलग-अलग वायरस इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इबोला, डेंगू, मारबर्ग और येलो फीवर जैसे संक्रमण इसी कैटेगरी में माने जाते हैं। यह संक्रमण कई बार संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ, संक्रमित जानवरों, मच्छरों या दूषित वातावरण के संपर्क से फैल सकता है। कौन-सा वायरस है, उसके हिसाब से फैलने का तरीका बदल सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
04 Jun 2026 03:31 pm
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