
जयपुर. ये आंखें ऑलअराउंड कम्प्यूटर से बातें करती हैं...यानी आज के युवा अपना ज्यादातर समय कम्प्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल जैसे तमाम गैजेट्स के साथ बिताते हैं। यह सच है कि अब यंगस्टर्स टेक्नोलॉजी के बिना अधूरे हैं, क्योंकि टेक्नोलॉजी ने हमारी लाइफस्टाइल को ईजी बनाने में काफी मदद की है।
यह समझना भी जरूरी है कि टेक्नोलॉजी का सही और संतुलित इस्तेमाल कैसे किया जाए, क्योंकि ऐसा ना करना हमारे लिए घातक सिद्ध हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कम्प्यूटर या दूसरीे डिजिटल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले लोग कम्प्यूटर विजन सिंड्रोम (सीवीएस) डिजीज का शिकार हो सकते हैं।
ऐसे में जरूरत है कि अभी से इसके प्रति लोगों की अवेयरनेस बढ़ाई जाए। उधर, मनोवैज्ञानिक भी इसे डिसऑर्डर मान रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार टेक्नोलॉजी और सोशल नेटवर्किंग का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति गैजेट्स के एडिक्टेड भी हो जाते हैं।
इसमें बार-बार सोशल नेटवर्किंग पर जाना, वीडियो गेम खेलना और बार-बार मोबाइल को देखना भी शामिल है। एक रिसर्च के अनुसार दुनियाभर में 70 मिलियन वर्कर्स कम्प्यूटर विजन सिंड्रोम से पीड़ित हैं। आमतौर पर कई लोग कमरे में अंधेरा कर मोबाइल की ब्राइटनेस बढ़ाकर यूज करते है, जिससे सीवीएस का ज्यादा खतरा बढ़ता है।
देश में 16 मिलियन को सीवीएस
एक अनुमान के मुताबिक देशभर में 20 मिलियन से ज्यादा कम्प्यूटर पॉपुलेशन है। इसमें 80 परसेंट यानी 16 मिलियन लोग कम्प्यूटर विजन सिंड्रोम से पीड़ित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दुनियाभर के बड़े शहरों में 70 से 90 परसेंट लोग आम जीवन में इस समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें कम्प्यूटर-मोबाइल गेम खेलने वाले बच्चे और सोशल नेटवर्किंग का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले यंगस्टर्स की संख्या बढ़ी है।
ये होती हैं समस्याएं
आईस्ट्रेन, हेडेक, ब्लर विजन, ड्राई आईज, रेड आइज, आंखों में जलन, गर्दन और कमर दर्द।
ऐसे बचें
- आपकी स्क्रीन आई लेवल के बराबर हो या फिर उससे थोड़ी नीचे हो।
- कम्प्यूटर पर काम के दौरान सीधे बैठें और बार-बार आंखों को ब्लिंक करें।
- 30 से 45 मिनट के बाद ब्रेक जरूर लें इससे आई मसल्स रिलेक्स होंगी।
- काम से ब्रेक लेकर दूर की चीजों को देखने की कोशिश करें।
- मॉर्निंग वॉक करें।
(एसएमएस हॉस्पिटल के सीनियर प्रोफेसर डॉ. कमलेश खिलनानी और डॉ. अपूर्व कोटिया के अनुसार)
Published on:
22 Jun 2016 08:51 am
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