
AI Image-(ChatGpt)
University of Massachusetts Amherst research: वैज्ञानिकों ने हाल ही में लैब में एक ऐसा जीवित हृदय ऊतक विकसित किया है, जो धड़कने के साथ बिजली उत्पन्न करने में सक्षम है। अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट के शोधकर्ताओं की ओर से की गई यह खोज चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है। यह तकनीक केवल बिजली बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि धड़कन के साथ विद्युत संकेत पैदा करके भविष्य में हृदय की गति पर नजर रखने वाले सेंसर का भी काम कर सकती है। इससे, पेसमेकर और दूसरे प्रत्यारोपित चिकित्सा उपकरणों के लिए बैटरी पर निर्भरता कम हो सकती है।
शोधकर्ताओं ने प्लास्टिक की बहुत पतली पट्टियों से लगभग 7×8 मिलीमीटर आकार (मटर के दाने के बराबर) की एक जाली तैयार की है। इस जाली पर सीसा जिरकोनेट टाइटेनेट नामक सिरेमिक पदार्थ की 64 सूक्ष्म पट्टियां लगाई गई हैं, जो सिकुड़ने या मुड़ने पर विद्युत वोल्टेज पैदा करती हैं। शुरुआती डिजाइन में प्रत्येक धड़कन से करीब 9 मिलीवोल्ट का संकेत मिला था, जिसे परतों की मोटाई बढ़ाकर 450 से 750 मिलीवोल्ट तक पहुंचा दिया गया है।
वर्तमान में अगर किसी का दिल सही से काम नहीं करता, तो डॉक्टर उसके शरीर में पेसमेकर नामक एक छोटी मशीन लगाते हैं, जो दिल को धड़कने के लिए बिजली के झटके देती है। इन पेसमेकर्स में बैटरी होती है, जो 7 से 10 साल में खत्म हो जाती है। बैटरी बदलने के लिए मरीज को बार-बार सर्जरी से गुजरना पड़ता है, जो दर्दनाक और खर्चीला होता है। वैज्ञानिकों की यह नई तकनीक इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है, क्योंकि यह उपकरण मरीज के अपने ही दिल की धड़कन से जिंदगी भर चार्ज होता रहेगा।
आगे चलकर इस तकनीक का उपयोग ऐसे छोटे बायो-रोबोट या कृत्रिम अंग बनाने में किया जा सकता है, जो खुद की ऊर्जा से काम करेंगे। हालांकि अभी इसका सफल परीक्षण प्रयोगशाला में हुआ है और इंसानी शरीर में इसका इस्तेमाल होने में कुछ समय बाकी है, लेकिन यह खोज इस बात का सबूत है कि आने वाले समय में चिकित्सा विज्ञान पूरी तरह बदलने वाला है।
Published on:
27 Oct 2026, 1:00 AM IST
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