
बार-बार बीमार पड़ना इस बात का संकेत हो सकता है कि आपके शरीर में सफेद रक्त कोशिकाएं कम हो गई हैं।- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Low White Blood Cell Count Symptoms: क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि मौसम बदलते ही सबसे पहले आप बीमार पड़ते हैं? इसे सिर्फ मौसम का बहाना मानकर मत छोड़िए। बार-बार बीमार पड़ना इस बात का संकेत हो सकता है कि आपके शरीर में White Blood Cells (WBC यानी सफेद रक्त कोशिकाएं) कम हो गई हैं।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, जब शरीर में इनकी संख्या कम होती है, तो हमारी बीमारियों से लड़ने की ताकत दम तोड़ने लगती है। आइए समझते हैं कि ये क्या है और इसके कम होने के पीछे क्या कारण होते हैं।
हमारे खून में तीन तरह की कोशिकाएं होती हैं, लाल (Red), सफेद (White) और प्लेटलेट्स। इनमें से जो सफेद कोशिकाएं (WBC) होती हैं, वे हमारे शरीर की बॉडीगार्ड की तरह हैं। जब भी कोई वायरस, बैक्टीरिया या बीमारी हमारे शरीर पर हमला करती है, तो ये उनसे लड़कर हमें बचाते हैं। इसे ल्यूकोपेनिया (Leukopenia) कहते हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, ल्यूकोपेनिया (श्वेत रक्त कोशिकाओं की कम संख्या) तब होता है जब आपके शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या सामान्य से कम होती है। जब आप डॉक्टर के पास जाते हैं और वह आपका CBC (Complete Blood Count) नाम का ब्लड टेस्ट करते हैं, तब इसका पता चलता है। आमतौर पर एक स्वस्थ वयस्क के शरीर में 1 माइक्रोलीटर खून में इसकी संख्या 3,500 से कम होने पर इसे लो काउंट माना जाता है।
मेयो क्लिनिक की रिपोर्ट बताती है कि हमारे शरीर में ज़्यादातर सफेद कोशिकाएं हड्डियों के अंदर मौजूद बोन मैरो (Bone Marrow हड्डियों के बीच का स्पंजी हिस्सा) में बनती हैं। अगर इनके बनना धीरे हो जाए या ये जल्दी नष्ट होने लगें, तो काउंट गिर जाता है। इसके बड़े कारण ये हो सकते हैं:
बिल्कुल नहीं! मेयो क्लिनिक के अनुसार, हर बार टेस्ट में काउंट कम आने का मतलब यह नहीं होता कि कोई गंभीर बीमारी है। कई बार अलग-अलग लैब के पैमानों की वजह से ऐसा दिखता है। उम्र, जेंडर और आपकी नस्ल (Race) के हिसाब से भी यह ऊपर-नीचे हो सकता है। कई बार एक साधारण वायरल इन्फेक्शन के दौरान यह अस्थायी (temporary) रूप से गिरता है और ठीक होने पर खुद-ब-खुद सामान्य हो जाता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
29 Jun 2026 06:35 pm
Published on:
30 Jun 2026 09:00 am
बड़ी खबरें
View Allस्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
