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Malaria Diagnostic Tests: ठंड के साथ बुखार आना सिर्फ वायरल नहीं! हो सकता है मलेरिया, CDC और WHO के अनुसार जानें सही जांच

Malaria Diagnostic Tests: मलेरिया का पता कैसे चलता है? आइए CDC और WHO से जानते हैं ब्लड स्मीयर और रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) जैसे तरीकों के बारे में जो मलेरिया का पता लगाने के लिए होते हैं।
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भारत

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Nidhi Yadav

Jun 26, 2026

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मलेरिया संक्रमित एनाफिलीज (Anopheles) मादा मच्छर के काटने से होती है।- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Malaria Diagnostic Tests: जब भी किसी को तेज बुखार, ठंड लगना या बदन दर्द की शिकायत होती है, तो सबसे पहला शक वायरल बुखार पर जाता है। पर, ये मलेरिया का भी संकेत हो सकता है। यह एक ऐसी बीमारी है जो संक्रमित एनाफिलीज (Anopheles) मादा मच्छर के काटने से होती है। लेकिन क्या सिर्फ लक्षणों को देखकर मलेरिया का इलाज शुरू कर देना चाहिए?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और सीडीसी (CDC) का साफ कहना है कि मलेरिया का सही और पक्का इलाज तभी मुमकिन है जब लैब टेस्ट के जरिए यह साफ हो जाए कि मरीज को मलेरिया ही है और वह किस प्रकार (स्ट्रैन) का है। आइए जानते हैं मलेरिया के लिए कौन-कौन से मुख्य टेस्ट किए जाते हैं।

1. ब्लड स्मीयर टेस्ट

सीडीसी के मुताबिक, मलेरिया की जांच के लिए इसे आज भी गोल्ड स्टैंडर्ड यानी सबसे पक्का और बेस्ट तरीका माना जाता है।इसमें मरीज की उंगली या नस से खून की एक बूंद ली जाती है। उसे कांच की एक पट्टी (Slide) पर फैलाकर ब्लड स्मीयर तैयार किया जाता है। फिर लैब एक्सपर्ट इसे माइक्रोस्कोप (सूक्ष्मदर्शी) के नीचे देखते हैं। इस टेस्ट से न सिर्फ यह पता चलता है कि खून में मलेरिया का परजीवी (Parasite) मौजूद है या नहीं, बल्कि यह भी साफ हो जाता है कि मलेरिया का कौन सा प्रकार (जैसे- प्लाज्मोडियम वाइवैक्स या फैल्सीपेरम) है। इससे डॉक्टर को सही दवा चुनने में बहुत मदद मिलती है।

2. रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT)

यह टेस्ट उन जगहों के लिए वरदान है जहां बड़ी लैब या माइक्रोस्कोप की सुविधा तुरंत उपलब्ध नहीं होती (जैसे दूर-दराज के गांव या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र)। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, यह टेस्ट बिल्कुल घर पर की जाने वाली प्रेगनेंसी किट या शुगर टेस्ट की तरह काम करता है। प्लास्टिक की एक छोटी सी किट पर मरीज के खून की एक बूंद डाली जाती है। यह किट खून के अंदर मलेरिया परजीवी द्वारा छोड़े गए खास प्रोटीन (Antigens) को पहचान लेती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए किसी बड़ी मशीन की जरूरत नहीं होती और मात्र 15 से 20 मिनट के भीतर पता चल जाता है कि मरीज को मलेरिया है या नहीं।

3. पीसीआर टेस्ट (PCR - Polymerase Chain Reaction)

यह एक बहुत ही एडवांस और आधुनिक टेस्ट है। जब खून में मलेरिया के परजीवियों की संख्या बहुत कम होती है और वे माइक्रोस्कोप से भी दिखाई नहीं देते, तब पीसीआर टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। यह टेस्ट मलेरिया परजीवी के डीएनए (DNA) की पहचान करता है। यह टेस्ट बेहद सटीक परिणाम देता है। हालांकि, इसकी रिपोर्ट आने में थोड़ा समय लगता है और यह थोड़ा महंगा होता है, इसलिए इसका इस्तेमाल आमतौर पर रिसर्च या बहुत उलझे हुए मामलों में ही किया जाता है।

4. एंटीबॉडी या सेरोलॉजी टेस्ट (Antibody Test)

इस टेस्ट के जरिए डॉक्टर यह देखते हैं कि क्या आपके शरीर ने कभी मलेरिया से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाई थी। सीडीसी के अनुसार, इस टेस्ट से यह पता नहीं चलता कि मरीज को अभी मलेरिया है या नहीं। इसलिए अचानक आए बुखार की जांच के लिए इस टेस्ट का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यह सिर्फ पुरानी हिस्ट्री जानने के काम आता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।