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युवाओं में दिमाग और नस से जुड़ी समस्या का खतरा तेजी से बढ़ रहा, मेयो क्लिनिक ने Multiple Sclerosis के कारण व लक्षण बताए

Multiple Sclerosis Cause: 20 से 40 साल की उम्र में युवाओं में ज्यादा होता है Multiple Sclerosis का खतरा। मेयो क्लिनिक के हवाले से जानिए इस बीमारी के शुरुआती लक्षण और कारण क्या होते हैं साथी ही कब डॉक्टर से मिलना चाहिए।
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भारत

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Nidhi Yadav

Jun 25, 2026

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मल्टीपल स्क्लेरोसिस (एमएस) एक ऑटोइम्यून स्थिति है जो आपके मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है।- प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- freepik)

Multiple Sclerosis Symptoms: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर छोटी-मोटी थकान, हाथ-पैरों में झनझनाहट या कमजोरी को यह सोचकर टाल देते हैं कि शायद काम ज्यादा कर लिया था। लेकिन अगर आपकी उम्र 20 से 40 साल के बीच है और ये दिक्कतें बार-बार हो रही हैं, तो इन्हें हल्के में मत लीजिए।

मेयो क्लिनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, युवाओं में मल्टीपल स्केलेरोसिस (Multiple Sclerosis - MS) नाम की एक न्यूरोलॉजिकल कंडीशन (दिमाग और नस से जुड़ी समस्या) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। आइए समझते हैं कि यह बीमारी क्या है और शरीर हमें क्या संकेत देता है।

आखिर क्या होता है मल्टीपल स्केलेरोसिस?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, मल्टीपल स्क्लेरोसिस (एमएस) एक ऑटोइम्यून स्थिति है जो आपके मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है। हमारे दिमाग और रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) की नसों के ऊपर भी एक कुदरती सुरक्षा कवच होता है, जिसे मेडिकल भाषा में माइलिन (Myelin) कहते हैं।

मल्टीपल स्केलेरोसिस में हमारे शरीर का गार्ड गलती से रास्ता भटक जाता है। वह बाहरी बीमारियों से लड़ने के बजाय हमारी अपनी ही नसों के इस सुरक्षा कवच (माइलिन) पर हमला करके उसे नुकसान पहुंचाने लगता है। जब यह कवच खराब हो जाता है, तो दिमाग से शरीर के बाकी हिस्सों तक पहुंचने वाले सिग्नल्स अटकने लगते हैं, जिससे शरीर पर से हमारा कंट्रोल कम होने लगता है।

युवाओं को क्यों है ज्यादा खतरा?

मेयो क्लिनिक के अनुसार, यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ चीजें इसका खतरा बढ़ा देती हैं;

  • यह बीमारी सबसे ज्यादा 20 से 40 साल की उम्र के युवाओं को अपना शिकार बनाती है।
  • महिलाओं में मल्टीपल स्केलेरोसिस होने की संभावना 2 से 3 गुना ज्यादा होती है।
  • परिवार में से किसी को यह समस्या रही है, तो इसका रिस्क थोड़ा बढ़ जाता है।
  • विटामिन डी की कमी।

शरीर में दिखने वाले शुरुआती लक्षण

  • हाथ-पैरों का सुन्न होना या झनझनाहट।
  • चलने-फिरने में संतुलन खोना।
  • आंखों से धुंधला दिखना।
  • ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होना।
  • गर्दन हिलाने पर झटका लगना।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

अगर ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण आपको बिना किसी वजह के बार-बार महसूस हो रहा है, तो बिना देर किए तुरंत किसी न्यूरोलॉजिस्ट (नस के डॉक्टर) से संपर्क करना चाहिए। शुरुआत में ही टेस्ट की मदद से इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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