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सांस फूलना और छाती में भारीपन हो सकता है दिल में पानी भरने का संकेत, Cleveland Clinic से जानिए Pericardial Effusion क्या है

Pericardial Effusion Symptoms: Cleveland Clinic और MedlinePlus के अनुसार सांस फूलना, छाती में भारीपन, थकान और तेज धड़कन Pericardial Effusion यानी दिल में पानी भरने के संकेत हो सकते हैं। जानिए इसके कारण और लक्षण।

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भारत

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Dimple Yadav

Jun 18, 2026

Pericardial Effusion Fluid Around Heart Heart Water Accumulation

छाती में भारीपन को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- freepik)

Pericardial Effusion Symptoms: अगर सीढ़ियां चढ़ते समय आपकी सांस जल्दी फूल जाती है, छाती में भारीपन महसूस होता है या बिना ज्यादा मेहनत किए भी थकान होने लगती है, तो इसे हमेशा उम्र, कमजोरी या मौसम का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में ये लक्षण पेरिकार्डियल एफ्यूजन (Pericardial Effusion) यानी दिल के आसपास पानी (तरल पदार्थ) जमा होने का संकेत हो सकते हैं।

Cleveland Clinic और MedlinePlus के अनुसार, यह स्थिति तब होती है जब दिल को घेरे रहने वाली दो परतों वाली झिल्ली (Pericardium) के बीच सामान्य से अधिक तरल पदार्थ जमा हो जाता है। अगर यह तरल बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो दिल पर दबाव पड़ सकता है और उसके काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

Pericardial Effusion क्या होता है?

हमारा दिल एक पतली झिल्ली से घिरा होता है, जिसे Pericardium कहा जाता है। सामान्य रूप से इसके अंदर थोड़ी मात्रा में तरल पदार्थ मौजूद रहता है, जो दिल को सुरक्षित रखने और घर्षण कम करने में मदद करता है। लेकिन जब किसी कारण से इस झिल्ली के बीच अतिरिक्त तरल जमा होने लगता है, तो उसे पेरिकार्डियल एफ्यूजन कहा जाता है। कई बार यह धीरे-धीरे विकसित होता है, जबकि कुछ मामलों में अचानक भी हो सकता है।

शरीर कौन से संकेत देता है?

पेरिकार्डियल एफ्यूजन के लक्षण जमा हुए तरल की मात्रा और उसके बढ़ने की गति पर निर्भर करते हैं। इसके सामान्य संकेतों में शामिल हैं:

  1. सांस फूलना

यह सबसे आम लक्षणों में से एक है। शुरुआत में केवल सीढ़ियां चढ़ने या चलने पर सांस फूल सकती है, लेकिन गंभीर स्थिति में आराम करते समय भी परेशानी हो सकती है।

  1. छाती में भारीपन या दर्द

कुछ लोगों को छाती में दबाव, भारीपन या हल्का दर्द महसूस हो सकता है। यह दर्द कभी-कभी कंधे या पीठ तक भी जा सकता है।

  1. लगातार थकान

दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ने से शरीर को पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे व्यक्ति जल्दी थक सकता है।

  1. दिल की धड़कन तेज महसूस होना

कुछ लोगों को ऐसा लग सकता है कि उनका दिल सामान्य से ज्यादा तेजी से धड़क रहा है।

  1. लेटने पर सांस लेने में दिक्कत

कई मरीजों को सीधे लेटने पर सांस लेने में ज्यादा परेशानी महसूस होती है और बैठने पर राहत मिलती है।

दिल में पानी क्यों भरता है?

Cleveland Clinic के अनुसार इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे:

  • वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण
  • दिल की सर्जरी के बाद की जटिलताएं
  • ऑटोइम्यून बीमारियां
  • किडनी फेलियर
  • कुछ प्रकार के कैंसर
  • छाती में गंभीर चोट
  • थायरॉयड की कुछ समस्याएं

कई बार कारण का पता भी नहीं चल पाता।

कब बन सकती है गंभीर स्थिति?

अगर तरल बहुत तेजी से जमा हो जाए, तो Cardiac Tamponade नाम की गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसमें दिल पर इतना दबाव पड़ता है कि वह शरीर में पर्याप्त रक्त नहीं पंप कर पाता। यह मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है और तुरंत इलाज की जरूरत होती है।

डॉक्टर इसका पता कैसे लगाते हैं?

पेरिकार्डियल एफ्यूजन की पुष्टि के लिए डॉक्टर इकोकार्डियोग्राम (Echo), ECG, चेस्ट एक्स-रे, CT Scan, MRI की जांचें कर सकते हैं। इन जांचों से यह पता चलता है कि दिल के आसपास कितना तरल जमा है और उसका दिल पर क्या असर पड़ रहा है।

इलाज कैसे किया जाता है?

इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी गंभीर है और उसका कारण क्या है। कुछ मामलों में केवल निगरानी और दवाओं से स्थिति संभल सकती है। लेकिन अगर तरल ज्यादा हो या दिल पर दबाव डाल रहा हो, तो डॉक्टर अतिरिक्त तरल निकालने की प्रक्रिया (Pericardiocentesis) की सलाह दे सकते हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि आपको लगातार सांस फूलने, छाती में दबाव, तेज धड़कन, चक्कर या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लें। खासकर यदि लक्षण अचानक बढ़ रहे हों, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।