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पीरियड्स का समय बदलना, अचानक गर्मी लगना और नींद न आना! मेयो क्लिनिक से जानिए क्या शुरू हो चुका है Perimenopause

Perimenopause Symptoms: क्या पीरियड्स का समय बदलने लगा है और अचानक बहुत तेज गर्मी लगती है? मेयो क्लिनिक से जानिए क्या यह पेरिमेनोपॉज की शुरुआत है और शरीर में क्या बदलाव आते हैं।
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भारत

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Nidhi Yadav

Jul 13, 2026

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पीरियड्स पूरी तरह बंद होने से कुछ साल पहले ही शरीर में बदलाव शुरू हो जाते हैं- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Perimenopause Symptoms Hindi: हर महिला की जिंदगी में एक वक्त ऐसा आता है जब उनके पीरियड्स (मासिक धर्म) हमेशा के लिए बंद होने वाले होते हैं, जिसे हम मेनोपॉज कहते हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं कि पीरियड्स पूरी तरह बंद होने से कुछ साल पहले ही शरीर में बदलाव शुरू हो जाते हैं? इसी शुरुआती दौर को मेडिकल की भाषा में पेरिमेनोपॉज कहा जाता है। मेयो क्लिनिक के मुताबिक, यह कोई बीमारी नहीं है बल्कि महिलाओं के शरीर में होने वाला एक सामान्य बदलाव है। आइए जानते हैं कि जब यह दौर शुरू होता है, तो शरीर में क्या-क्या बदलाव आते हैं और इसके लक्षण क्या हैं।

पेरिमेनोपॉज होता क्या है?

इसे आप मेनोपॉज की तैयारी का दौर कह सकते हैं। इस दौरान महिला के शरीर में एस्ट्रोजन नाम का हार्मोन ऊपर-नीचे (कम-ज्यादा) होने लगता है। इसकी वजह से पीरियड्स आने का पूरा चक्र बदलने लगता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, यह दौर आमतौर पर 40 से 45 साल की उम्र के बीच शुरू हो सकता है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह इससे पहले भी दिख सकता है।

शरीर में दिखने वाले 5 बड़े बदलाव और लक्षण

जब पेरिमेनोपॉज की शुरुआत होती है, तो शरीर ये खास इशारे देने लगता है;

1. पीरियड्स का टाइम बदलना- कभी पीरियड्स जल्दी-जल्दी आने लगते हैं, तो कभी दो-तीन महीने तक आते ही नहीं। कभी ब्लीडिंग बहुत ज्यादा होती है, तो कभी बिल्कुल हल्की।

2. अचानक बहुत तेज गर्मी लगना (हॉट फ्लैशेस)- बैठे-बैठे अचानक पूरे शरीर में, खासकर चेहरे और गर्दन पर बहुत तेज गर्मी महसूस होने लगती है, चेहरा लाल हो जाता है और पसीना छूटने लगता है।

3. नींद न आना- रात में अचानक आंख खुल जाना या ठीक से गहरी नींद न आना इस दौर में आम बात है। कई बार रात में सोते समय बहुत ज्यादा पसीना आने की वजह से भी नींद टूट जाती है।

4. मूड का बार-बार बदलना- बिना किसी बात के अचानक चिड़चिड़ापन होना, गुस्सा आना, उदास महसूस होना या घबराहट होना हार्मोन्स के उतार-चढ़ाव की वजह से होता है।

5. वजन बढ़ना और सुस्ती- इस दौरान शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे वजन (खासकर पेट के आसपास की चर्बी) बढ़ने लगता है और हर वक्त थकान महसूस होती है।

क्या इस दौरान डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?

यह शरीर का एक नेचुरल प्रोसेस है, इसलिए हर बार डॉक्टर के पास भागने की जरूरत नहीं होती। लेकिन, अगर ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो रही हो (जैसे हर घंटे पैड बदलना पड़े), पीरियड्स कई महीनों तक न आएं, या ये लक्षण आपकी रोज की जिंदगी को बहुत ज्यादा परेशान कर रहे हों, तो एक बार डॉक्टर से मिलकर सलाह लेना अच्छा रहता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।