
Sperm Recovery (Image- gemini)
Sperm Recovery: कैंसर या खून की गंभीर बीमारियों का इलाज (कीमोथेरेपी और रेडिएशन) जान तो बचा लेता है, लेकिन कई बार यह हमेशा के लिए बांझ बना देता है। जब कोई बच्चा इस इलाज से गुजरता है, तो बड़ा होने पर उसके पिता बनने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है। लेकिन बेल्जियम के डॉक्टरों ने इस नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है। एक 28 साल के युवक ने, जिसने 10 साल की उम्र में अपना टिश्यू सुरक्षित रखवाया था, अब इस तकनीक की मदद से बाप बनने का सुख पा सकेगा। चलिए जानते हैं आखिर यह पूरा मामला क्या है और डॉक्टरों ने यह जादू कैसे किया।
बात साल 2008 की है, जब यह मरीज महज 10 साल का था। उसे सिकल सेल एनीमिया थी, जिसके इलाज के लिए उसे कीमोथेरेपी देनी थी। डॉक्टरों को पता था कि इस इलाज से बच्चा आगे चलकर पिता नहीं बन पाएगा। इसलिए, उसकी फैमिली की मर्जी से डॉक्टरों ने उसके एक टेस्टिकल का छोटा सा हिस्सा निकालकर उसे बहुत कम तापमान पर फ्रीज कर दिया। मकसद ये था कि शायद भविष्य में कोई ऐसी तकनीक आए जो उसे पिता बनने में मदद करे।
बड़ा होने पर इस शख्स ने शादी की और बच्चा चाहा, लेकिन कुदरत साथ नहीं दे रही थी। कीमोथेरेपी की वजह से उसके शरीर में शुक्राणु बनना पूरी तरह बंद हो चुके थे। तब उसने डॉक्टरों से उसी पुराने 'फ्रोजन टिश्यू' का इस्तेमाल करने की गुजारिश की। साल 2025 में डॉक्टरों ने एक जटिल सर्जरी के जरिए उस 18 साल पुराने टिश्यू को वापस उसके शरीर में लगा दिया।
ट्रांसप्लांट के एक साल बाद जब डॉक्टरों ने जांच की, तो वे दंग रह गए। शरीर में जो हिस्सा लगाया गया था, उसने अपना काम करना शुरू कर दिया था। उस पुराने टिश्यू की वजह से मरीज के शरीर में अब जिंदा और स्वस्थ शुक्राणु बन रहे हैं। हालांकि, ये शुक्राणु कुदरती तरीके से बाहर नहीं आ पा रहे हैं, लेकिन डॉक्टर अब इन्हें लैब में निकालकर IVF (टेस्ट ट्यूब बेबी) तकनीक के जरिए उसे पिता बना सकते हैं।
यह खबर इसलिए बड़ी है क्योंकि दुनिया भर में कैंसर से जूझ रहे हजारों बच्चे इलाज के बाद बांझपन का शिकार हो जाते हैं। अब तक यह सिर्फ एक थ्योरी थी कि बचपन का टिश्यू बड़े होने पर काम आ सकता है, लेकिन इस केस ने साबित कर दिया कि यह मुमकिन है। बेल्जियम के इस अस्पताल ने अब तक करीब 3,000 बच्चों के टिश्यू फ्रीज किए हैं, जिनके लिए अब पिता बनने का रास्ता खुल गया है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
07 May 2026 12:00 pm
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