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SUMAN Roadmap 2030: गर्भवती महिलाओं और नवजातों के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम; जानें क्या है सुमन रोडमैप 2030, इसके लक्ष्य और फायदे

SUMAN Roadmap 2030: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सुमन रोडमैप 2030 का तोहफा दिया है। अभी जानें कैसे यह नया प्लान देश में गर्भवती महिलाओं और नवजातों की स्वास्थ्य सुविधाओं को बदलकर रोकी जा सकने वाली मौतों को जीरो (Zero) करेगा।
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भारत

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Nidhi Yadav

Jun 29, 2026

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सुमन रोडमैप 2030 के तहत सरकार ने कुछ बहुत ही जरूरी और बड़े लक्ष्य तय किए हैं, जिन्हें साल 2030 तक पूरा किया जाना है- प्रतीकात्मक तस्वीर (source- freepik)

SUMAN Roadmap 2030: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (सीसीएचएफडब्ल्यू) के 16वें सम्मेलन के दौरान सुमन रोडमैप 2030 (SUMAN Roadmap 2030) का विमोचन किया है। मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने और 2030 तक मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) की दिशा में प्रगति को गति देने के लिए तैयार किया गया है।

भारत ने पिछले दशक में मातृ स्वास्थ्य में सुधार दर्ज किए हैं, फिर भी लगातार बनी हुई कमियां मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने में बाधा हैं, इसी को देखते हुए, नए सिरे से इस महत्वपूर्ण रोडमैप को विकसित किया गया है।

क्या है इसका मुख्य लक्ष्य?

सुमन रोडमैप 2030 के तहत सरकार ने कुछ बहुत ही जरूरी और बड़े लक्ष्य तय किए हैं, जिन्हें साल 2030 तक पूरा किया जाना है;

1. मातृ मृत्यु दर (MMR) को कम करना- सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप साल 2030 तक मातृ मृत्यु दर (MMR) को प्रति 100,000 जीवित जन्मों पर 70 से नीचे लाना है।

2. शिशु मृत्यु दर में कमी- नवजात मृत्यु दर (NMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को तेजी से कम करना इसका मुख्य लक्ष्य है।

3. सेवाओं की पूरी उपलब्धता (सैचुरेशन)- देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करना और संतृप्ति (सैचुरेशन) प्राप्त करना है।

4. रोकी जा सकने वाली मौतों को जीरो करना- इसका सबसे बड़ा अंतिम लक्ष्य यह है कि सही समय पर इलाज और देखभाल देकर रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मृत्यु को पूरी तरह से शून्य करने के लक्ष्य को प्राप्त करना है।

आम जनता और देश को इससे क्या फायदे होंगे?

यह रोडमैप गर्भावस्था से पहले की देखभाल, प्रसवपूर्व देखभाल, प्रसवकालीन देखभाल और प्रसवोत्तर देखभाल सहित देखभाल के सभी चरणों में हस्तक्षेपों को एकीकृत करता है। इस रोडमैप में असम, बिहार, Chhattisgarh, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल सहित 13 उच्च-फोकस वाले राज्यों के 130 जिलों में लक्षित रणनीतियों को प्रस्तुत किया गया है।

रिस्क (उच्च जोखिम) वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष ट्रैकिंग

गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं को अधिक खतरा होता है, उनकी पहचान और मैनेजमेंट के लिए एक खास चार-चरणीय (4-Stage) ढांचा तैयार किया गया है;

  • गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था।
  • विशेष रूप से तीसरी तिमाही में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था।
  • प्रसव के दौरान उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था
  • प्रसवोत्तर उच्च जोखिम वाली माताओं की निगरानी।

गर्भवती महिलाओं के लिए क्या विशेष सुविधाएं मिलेंगी?

1. ASHAs द्वारा घर-घर जाकर जांच- रोडमैप में गर्भवती महिलाओं के लिए एक व्यापक SUMAN पैकेज प्रस्तावित किया गया है, जिसका उद्देश्य समय पर पंजीकरण, संपूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल, गुणवत्तापूर्ण नैदानिक ​​मूल्यांकन और प्रसवोत्तर संस्थागत देखभाल को बढ़ावा देना है। गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान सामुदायिक स्तर पर किए जाने वाले हस्तक्षेपों में गर्भावस्था के आठवें और नौवें महीने में ASHAs द्वारा सप्ताह में दो बार घर-घर जाकर खतरे के लक्षणों की जांच, पोषण संबंधी परामर्श, प्रसव की तैयारी और संस्थागत प्रसव को सुदृढ़ करना शामिल है।

2. वित्तीय सहायता और बेहतर एम्बुलेंस- इस रोडमैप में प्रसवोत्तर की महत्वपूर्ण अवधि के दौरान माताओं के साथ रहने के लिए एक नामित देखभालकर्ता के लिए वित्तीय सहायता और प्रसूति संबंधी आपात स्थितियों के दौरान समय पर परिवहन सुनिश्चित करने के लिए रेफरल परिवहन को मजबूत करने का प्रस्ताव है, विशेष रूप से दुर्गम और कम सेवा वाले क्षेत्रों में।

3. इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती- कठिन और कम सेवा वाले क्षेत्रों में जन्म प्रतीक्षा गृह (बीडब्ल्यूएच), मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग, प्रसूति उच्च निर्भरता इकाई (एचडीयू) और गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) की अनिवार्य स्थापना के माध्यम से बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का प्रस्ताव है।

4. कुपोषण और एनीमिया पर वार- सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए, रोडमैप में गर्भधारण की योजना बना रही महिलाओं के लिए गर्भावस्था से पहले फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन को संस्थागत रूप देने और मातृ एनीमिया और कुपोषण से निपटने के लिए व्यापक पोषण संबंधी हस्तक्षेप करने की परिकल्पना की गई है।

डिजिटल मॉनिटरिंग और नई तकनीक का इस्तेमाल

  • प्रसव कक्षों का डिजिटलाइजेशन और एआई-सक्षम प्रसव कक्षों का उपयोग किया जाएगा।जननी पोर्टल के माध्यम से बेहतर डिजिटल निगरानी और रिपोर्टिंग की जाएगी।
  • प्रसूति रक्तस्राव के बेहतर प्रबंधन के लिए गैर-न्यूमेटिक एंटी-शॉक गारमेंट्स (एनएसजी) की शुरुआत की जाएगी।
  • लू और अन्य जलवायु संबंधी जोखिमों से निपटने के लिए एक जलवायु-अनुकूल कार्य योजना तैयार की जाएगी।
  • मजबूत शिकायत निवारण के लिए एक केंद्रीकृत सुमन कॉल सेंटर की स्थापना और स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच मजबूत रेफरल लिंकेज की परिकल्पना की गई है।
  • जन्म से 36 महीने की उम्र तक घर-आधारित देखभाल को कवर करने वाले शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम को लागू किया जाएगा।

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