
सुमन रोडमैप 2030 के तहत सरकार ने कुछ बहुत ही जरूरी और बड़े लक्ष्य तय किए हैं, जिन्हें साल 2030 तक पूरा किया जाना है- प्रतीकात्मक तस्वीर (source- freepik)
SUMAN Roadmap 2030: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (सीसीएचएफडब्ल्यू) के 16वें सम्मेलन के दौरान सुमन रोडमैप 2030 (SUMAN Roadmap 2030) का विमोचन किया है। मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने और 2030 तक मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) की दिशा में प्रगति को गति देने के लिए तैयार किया गया है।
भारत ने पिछले दशक में मातृ स्वास्थ्य में सुधार दर्ज किए हैं, फिर भी लगातार बनी हुई कमियां मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने में बाधा हैं, इसी को देखते हुए, नए सिरे से इस महत्वपूर्ण रोडमैप को विकसित किया गया है।
सुमन रोडमैप 2030 के तहत सरकार ने कुछ बहुत ही जरूरी और बड़े लक्ष्य तय किए हैं, जिन्हें साल 2030 तक पूरा किया जाना है;
1. मातृ मृत्यु दर (MMR) को कम करना- सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप साल 2030 तक मातृ मृत्यु दर (MMR) को प्रति 100,000 जीवित जन्मों पर 70 से नीचे लाना है।
2. शिशु मृत्यु दर में कमी- नवजात मृत्यु दर (NMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को तेजी से कम करना इसका मुख्य लक्ष्य है।
3. सेवाओं की पूरी उपलब्धता (सैचुरेशन)- देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करना और संतृप्ति (सैचुरेशन) प्राप्त करना है।
4. रोकी जा सकने वाली मौतों को जीरो करना- इसका सबसे बड़ा अंतिम लक्ष्य यह है कि सही समय पर इलाज और देखभाल देकर रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात मृत्यु को पूरी तरह से शून्य करने के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
यह रोडमैप गर्भावस्था से पहले की देखभाल, प्रसवपूर्व देखभाल, प्रसवकालीन देखभाल और प्रसवोत्तर देखभाल सहित देखभाल के सभी चरणों में हस्तक्षेपों को एकीकृत करता है। इस रोडमैप में असम, बिहार, Chhattisgarh, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल सहित 13 उच्च-फोकस वाले राज्यों के 130 जिलों में लक्षित रणनीतियों को प्रस्तुत किया गया है।
गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं को अधिक खतरा होता है, उनकी पहचान और मैनेजमेंट के लिए एक खास चार-चरणीय (4-Stage) ढांचा तैयार किया गया है;
1. ASHAs द्वारा घर-घर जाकर जांच- रोडमैप में गर्भवती महिलाओं के लिए एक व्यापक SUMAN पैकेज प्रस्तावित किया गया है, जिसका उद्देश्य समय पर पंजीकरण, संपूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल, गुणवत्तापूर्ण नैदानिक मूल्यांकन और प्रसवोत्तर संस्थागत देखभाल को बढ़ावा देना है। गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान सामुदायिक स्तर पर किए जाने वाले हस्तक्षेपों में गर्भावस्था के आठवें और नौवें महीने में ASHAs द्वारा सप्ताह में दो बार घर-घर जाकर खतरे के लक्षणों की जांच, पोषण संबंधी परामर्श, प्रसव की तैयारी और संस्थागत प्रसव को सुदृढ़ करना शामिल है।
2. वित्तीय सहायता और बेहतर एम्बुलेंस- इस रोडमैप में प्रसवोत्तर की महत्वपूर्ण अवधि के दौरान माताओं के साथ रहने के लिए एक नामित देखभालकर्ता के लिए वित्तीय सहायता और प्रसूति संबंधी आपात स्थितियों के दौरान समय पर परिवहन सुनिश्चित करने के लिए रेफरल परिवहन को मजबूत करने का प्रस्ताव है, विशेष रूप से दुर्गम और कम सेवा वाले क्षेत्रों में।
3. इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती- कठिन और कम सेवा वाले क्षेत्रों में जन्म प्रतीक्षा गृह (बीडब्ल्यूएच), मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग, प्रसूति उच्च निर्भरता इकाई (एचडीयू) और गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) की अनिवार्य स्थापना के माध्यम से बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का प्रस्ताव है।
4. कुपोषण और एनीमिया पर वार- सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए, रोडमैप में गर्भधारण की योजना बना रही महिलाओं के लिए गर्भावस्था से पहले फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन को संस्थागत रूप देने और मातृ एनीमिया और कुपोषण से निपटने के लिए व्यापक पोषण संबंधी हस्तक्षेप करने की परिकल्पना की गई है।
Published on:
29 Jun 2026 04:32 pm
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