
कैंसर की समय पर पहचान से बच सकती है जान- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Cancer Early Diagnosis Hindi: कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही हर कोई डर जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर कैंसर का पता शुरुआती चरण (Early Stage) में ही चल जाए, तो इसका इलाज काफी आसान हो जाता है और मरीज की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS England) के अनुसार, कैंसर की शुरुआती पहचान ही मरीजों को नया जीवन देने और उनकी सर्वाइवल रेट को सुधारने का सबसे प्रभावी जरिया है। NHS विभिन्न प्रकार के कैंसर की समय रहते पहचान करने के लिए लगातार नई तकनीकों, स्क्रीनिंग कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों पर काम कर रहा है। आइए जानते हैं अलग-अलग तरह के कैंसर और उनकी समय पर पहचान से जुड़ी बातों के बारे में।
WHO के अनुसार, फेफड़ों का कैंसर अक्सर शुरुआती चरणों में बिना किसी बड़े लक्षण के पनपता है, जिससे इसका पता देर से चलता है। शुरुआती जांच से लगभग 75% मामलों को पहली या दूसरी स्टेज में ही पकड़ लिया जाता है, जिससे समय रहते सही इलाज शुरू किया जा सकता है। NHS 55 से 74 वर्ष के उन लोगों के लिए लंग हेल्थ चेक और कम खुराक वाले सीटी स्कैन (Low-dose CT scan) की सुविधा देता है जो धूम्रपान करते हैं या पहले करते थे।
लिवर कैंसर के मामले पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहे हैं। यह कैंसर अक्सर काफी बाद में पकड़ में आता है जब लिवर को भारी नुकसान पहुंच चुका होता है।हेपेटाइटिस B या सिरोसिस (Cirrhosis) से पीड़ित उच्च जोखिम वाले मरीजों को हर 6 महीने में लिवर निगरानी और फाइब्रोस्कैन (Fibroscan) कराने की सलाह दी जाती है। शुरुआत में पता चलने पर डॉक्टर क्यूरेटिव ट्रीटमेंट (बीमारी को पूरी तरह ठीक करने वाला इलाज) कर पाते हैं।
गर्भाशय के ग्रीवा (Cervix) का कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है, लेकिन WHO के अनुसार इसकी रोकथाम और शुरुआती पहचान सबसे आसान है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार HPV Test या Pap Smear के जरिए सर्वाइकल कैंसर की पहचान कैंसर बनने से पहले (Pre-cancerous stage) ही की जा सकती है। प्री-कैंसर स्टेज में ही छोटी सी सर्जरी या साधारण इलाज से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले काफी देखने को मिलते हैं, लेकिन अगर गांठ या बदलाव को समय रहते पहचान लिया जाए तो यह पूरी तरह ठीक हो सकता है। WHO और NHS 50 से 69 वर्ष की महिलाओं के लिए नियमित मैमोग्राफी (Mammography) स्क्रीनिंग की सिफारिश करते हैं। शुरुआती स्टेज में स्तन कैंसर का पता चलने पर कम तकलीफदेह इलाज और छोटी सर्जरी से ही मरीज की जान बचाई जा सकती है।
बड़ी आंत या मलाशय का कैंसर भी काफी आम है, जिसकी शुरुआती जांच बहुत कारगर साबित होती है। इसके लिए स्टूल टेस्ट (Fecal Occult Blood Test) या कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy) के जरिए शुरुआती लक्षणों की जांच की जाती है। समय पर पहचान होने से आंतों में बनने वाले पॉलीप्स (Polyps) को कैंसर में बदलने से पहले ही निकाला जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कैंसर की समय पर पहचान को दो मुख्य भागों में बांटा है;
1.शुरुआती निदान (Early Diagnosis)- यह उन लोगों के लिए है जिनमें शरीर में कोई लक्षण (जैसे कोई गांठ, लगातार खांसी या वजन गिरना) दिखने लगे हों। लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर को दिखाना और जांच कराना इसके अंतर्गत आता है।
2. स्क्रीनिंग (Screening)- यह बिल्कुल स्वस्थ और बिना किसी लक्षण वाले लोगों की जाने वाली नियमित जांच है (जैसे मैमोग्राफी या HPV टेस्ट), ताकि छिपे हुए कैंसर या बीमारी की शुरुआती स्टेज को पहले ही पकड़ा जा सके।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
18 Aug 2026 09:13 am
Published on:
18 Aug 2026 09:13 am
