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इन 10 समस्याओं से जूझ रहे लोगों में बढ़ सकता है Venous Ulcer का खतरा, Cleveland Clinic से जानिए इसके शुरुआती संकेत

Chronic Venous Insufficiency: Cleveland Clinic, NCBI और NHS के अनुसार Varicose Veins, मोटापा, पैरों की सूजन और कुछ अन्य स्थितियों में Venous Ulcer का खतरा बढ़ सकता है। जानें शुरुआती संकेत और बचाव।
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भारत

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Dimple Yadav

Jun 29, 2026

Venous Ulcer Venous Ulcer Symptoms Venous Ulcer Risk

लंबे समय तक न भरने वाला घाव Venous Ulcer के जोखिम का संकेत हो सकते हैं (photo- freepik)

Venous Ulcer Risk Factors: अगर आपके पैरों में लंबे समय से सूजन रहती है, नसें उभरी हुई दिखती हैं या टखने के पास बना घाव कई हफ्तों बाद भी ठीक नहीं हो रहा, तो इसे सिर्फ मामूली परेशानी समझकर टालना ठीक नहीं है।

कई लोग पैर के घाव पर क्रीम या घरेलू उपाय करते रहते हैं, लेकिन जब घाव बार-बार खुलने लगे या भरने में बहुत समय लेने लगे, तो इसके पीछे नसों से जुड़ी समस्या भी हो सकती है। Cleveland Clinic के अनुसार, ऐसी स्थिति कुछ लोगों में
वेनस अल्सर का संकेत हो सकती है। यह ऐसा घाव होता है जो पैरों की नसों में रक्त प्रवाह ठीक से न होने के कारण बनता है और आसानी से नहीं भरता।

वेनस अल्सर आखिर होता क्या है?

वेनस अल्सर आमतौर पर पैर के निचले हिस्से, खासकर टखने के आसपास बनने वाला घाव है। जब पैरों की नसों के वाल्व ठीक से काम नहीं करते, तो खून नीचे की ओर जमा होने लगता है। इससे नसों में दबाव बढ़ता है और त्वचा तक ऑक्सीजन व पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाते। धीरे-धीरे त्वचा कमजोर होने लगती है और छोटा-सा घाव भी लंबे समय तक नहीं भरता।

किन लोगों में ज्यादा बढ़ जाता है वेनस अल्सर का खतरा?

NCBI (StatPearls) के अनुसार, हर व्यक्ति में Venous Ulcer नहीं होता, लेकिन कुछ स्थितियां इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं।

  1. Varicose Veins (उभरी हुई नसें)- अगर पैरों की नसें फूली हुई या मुड़ी-तुड़ी दिखाई देती हैं, तो नसों में रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है। लंबे समय तक इलाज न होने पर Venous Ulcer का खतरा बढ़ सकता है।
  2. पैरों में लगातार सूजन- टखनों या पैरों में रोजाना सूजन रहना इस बात का संकेत हो सकता है कि नसें सही तरीके से काम नहीं कर रही हैं।
  3. बढ़ती उम्र- उम्र बढ़ने के साथ नसों की कार्यक्षमता कम हो सकती है। यही वजह है कि बुजुर्गों में Venous Ulcer का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक देखा जाता है।
  4. मोटापा- अधिक वजन पैरों की नसों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
  5. लंबे समय तक खड़े रहना- शिक्षक, सिक्योरिटी गार्ड, सेल्स स्टाफ या फैक्ट्री में काम करने वाले लोग अगर घंटों खड़े रहते हैं, तो पैरों की नसों पर दबाव बढ़ सकता है।
  6. लंबे समय तक बैठे रहना- ऑफिस में लगातार बैठकर काम करना या शारीरिक गतिविधि कम होना भी रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकता है।
  7. पहले Deep Vein Thrombosis (DVT) होना- अगर पहले पैरों की गहरी नसों में खून का थक्का बन चुका है, तो बाद में नसों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे Venous Ulcer का जोखिम बढ़ सकता है।
  8. पहले पैर में Venous Ulcer हो चुका हो- जिन लोगों को पहले Venous Ulcer हो चुका है, उनमें दोबारा होने की संभावना अधिक रहती है।
  9. चलने-फिरने में कमी- कम शारीरिक गतिविधि की वजह से पैरों की मांसपेशियां रक्त को ऊपर की ओर भेजने में पर्याप्त मदद नहीं कर पातीं।
  10. पैरों की नसों की पुरानी बीमारी (Chronic Venous Insufficiency)- यह Venous Ulcer का सबसे बड़ा जोखिम कारकों में से एक माना जाता है। इसमें नसें खून को प्रभावी ढंग से हृदय तक वापस नहीं पहुंचा पातीं।

शरीर पहले कौन-से संकेत देता है?

NHS के अनुसार, वेनस अल्सर बनने से पहले कई लोगों में कुछ बदलाव दिखाई देने लगते हैं।

  • टखनों के आसपास सूजन।
  • पैरों में भारीपन या दर्द।
  • त्वचा का भूरा, लाल या बैंगनी पड़ना।
  • त्वचा में खुजली या रूखापन।
  • टखने के आसपास ऐसा घाव जो कई हफ्तों तक न भरे।
  • घाव से पानी या तरल निकलना।
  • अगर इन लक्षणों के साथ बदबू, पस, तेज दर्द या बुखार भी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

वेनस अल्सर से बचने के लिए क्या करें?

  • लंबे समय तक लगातार खड़े या बैठे न रहें।
  • रोजाना हल्की वॉक करें।
  • डॉक्टर की सलाह पर जरूरत पड़ने पर कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पहनें।
  • पैरों को समय-समय पर ऊपर उठाकर आराम दें।
  • वजन नियंत्रित रखें।
  • पैरों में किसी भी छोटे घाव की अनदेखी न करें।
  • अगर घाव दो से चार हफ्तों में भी ठीक न हो, तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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