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Wildfire Smoke: हाल के अध्ययनों में जंगल की आग के धुएं और सिर व गर्दन के कैंसर के बढ़ते जोखिम के बीच सीधा संबंध पाया गया है। जंगल की आग के धुएं में सूक्ष्म कणों (पीएम 2.5) की मात्रा बहुत अधिक होती है। इतने छोटे कण होने के कारण हमारी नाक के बाल या फेफड़ों के फिल्टर इन्हें रोक नहीं पाते और सांस लेने पर गले, सिर और गर्दन के ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं। अमरीका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और अन्य शोध संस्थानों के आंकड़ों के अनुसार, जंगल की आग के धुएं के संपर्क में आने से कैंसर होने के खतरा 6 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, जो सामान्य वायु प्रदूषण की तुलना में काफी ज्यादा हो सकता है। इस धुएं में पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन और अन्य कार्बनिक यौगिक होते हैं, जो शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन बढ़ाते हैं।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने लगभग 16 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जो लोग हर साल इस धुएं के प्रभाव में आते हैं, उनमें यह जोखिम 41 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनियाभर में हर साल कैंसर के कारण लगभग एक करोड़ मौतें होती हैं।
गाड़ियों या फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं के मुकाबले जंगल की आग का धुआं 10 गुना अधिक खतरनाक और जहरीला माना गया है। जब जंगल में आग लगती है, तो केवल पेड़-पौधे ही नहीं बल्कि कई तरह की सिंथेटिक सामग्रियां और रसायन भी जलते हैं। जब हम सांस लेते हैं, तो यह धुआं हमारे गले, सिर और गर्दन के ऊतकों को सीधा नुकसान पहुंचाता है और वहां कोशिकाओं को डैमेज करता है। इस धुएं में सामान्य प्रदूषण के मुकाबले कहीं ज्यादा मात्रा में ऑर्गेनिक कार्बन, जहरीले रसायन और भारी धातुएं घुली होती हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में जंगल की आग की घटनाएं बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। जंगल भले ही किसी एक देश या इलाके में जल रहे हों, लेकिन उनका धुआं हवा के साथ हजारों किलोमीटर दूर के शहरों तक पहुंच जाता है। पिछले कुछ समय में अमरीका, कनाडा, ब्रिटेन और यूरोप के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसके कारण करोड़ों लोग अनजाने में ही इस जहरीले धुएं में सांस लेने को मजबूर हैं, जिससे यह अब एक गंभीर वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है।
Published on:
27 Oct 2026, 4:00 AM IST
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