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पत्नी के ‘गुजारा भत्ते’ मामले पर हाइकोर्ट की अहम टिप्पणी, देने होंगे इतने रुपए

MP News: वैवाहिक बंधन में समानता का अर्थ विशेष रूप से पत्नी के लिए प्रतिबंध लगाना नहीं है।

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फोटो सोर्स: पत्रिका

फोटो सोर्स: पत्रिका

MP News: वैवाहिक बंधन में बंधने का अर्थ पत्नी के व्यक्तित्व का अंत नहीं है। माता-पिता की बीमारी में उनका ध्यान रखना सराहनीय है, लेकिन इसके कारण पति अपनी पत्नी को नजरअंदाज नहीं कर सकता है। यदि पति का माता-पिता के प्रति कर्तव्य है तो उसका यह भी दायित्व है कि वह उस पाठ्यक्रम को पूरा करने में मदद करे, जिससे पत्नी को सशक्त बनाया जा सके। वैवाहिक बंधन में समानता का अर्थ विशेष रूप से पत्नी के लिए प्रतिबंध लगाना नहीं है।

रतलाम परिवार न्यायालय में केस दायर

यह टिप्पणी हाईकोर्ट जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकलपीठ ने गुजारा भत्ता पाने के लिए पत्नी द्वारा हाईकोर्ट में दायर अपील की सुनवाई के दौरान की। रतलाम निवासी सोनाली (परिवर्तित नाम) ने अपील में उल्लेख किया था कि उनका विवाह अहमदाबाद निवासी ओएनजीसी में इंजीनियर सुशील (परिवर्तित नाम) से 20 फरवरी 2018 को हुआ था।

शादी के 4 माह बाद ही दहेज की मांग करते हुए पति ने घर से निकाल दिया। उन्होंने भरण पोषण के लिए रतलाम परिवार न्यायालय में केस दायर किया, लेकिन कोर्ट ने यह मानते हुए कि वे होम्योपैथिक चिकित्सक हैं और खुद कमा रही हैं, भरण पोषण देने से इनकार कर दिया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

रतलाम परिवार न्यायालय का फैसला खारिज

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि सोनाली ने होम्यौपेथी चिकित्सक की डिग्री सितंबर 2017 में प्राप्त की और पांच माह बाद उनका विवाह हो गया। फिलहाल वे जयपुर से होम्यौपेथी में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही हैं। केवल कोविड के दौरान आयुष चिकित्सक के रूप में उन्होंने 150 दिन से ज्यादा विभिन्न सरकारी डिस्पेंसरी में सेवा दी थी। जिसका 25 हजार रुपए प्रतिमाह वजीफा मिला था। 2018 में शादी को बचाने की कोशिश नाकाम होने पर केस दायर किया था। पति ने इसके बाद मार्च 2019 में अहमदाबाद में पत्नी को साथ रखने का केस दायर किया था।

सभी स्थितियों को देखने के बाद हाईकोर्ट ने रतलाम परिवार न्यायालय के फैसले को खारिज कर दिया और पत्नी को हर माह 15 हजार रुपए भरण पोषण के रूप में देने का आदेश दिया। जितने समय पत्नी को वजीफा मिला, उस समय के लिए कोर्ट ने भरण पोषण का पैसा नहीं देने को कहा है। कोर्ट ने पति को छूट दी है कि भविष्य में पत्नी को नौकरी मिल जाती है या स्थितियां बदलती हैं तो वह कोर्ट के समक्ष आवेदन कर सकता है।