
Khachrod Shri Ram Mandir: इंदौर हाईकोर्ट ने उज्जैन जिला कोर्ट का 58 साल पुराना फैसला पलटा (फोटो सोर्स- Patrika)
Indore High Court: मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के खाचरौद में स्थित पांच सदी पुराने ऐतिहासिक श्रीराम मंदिर के प्रबंधन और पुजारी के अधिकारों को लेकर 72 वर्षों से चल रहे कानूनी विवाद (Khachrod Shri Ram Mandir case) में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस विनय सराफ ने उज्जैन जिला कोर्ट के 28 जून 1968 के उस आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसके तहत मूल पुजारी रतनदास बैरागी के दावे को नामंजूर कर दिया गया था।
कोर्ट ने साफ कर दिया कि मंदिर और उसकी अरबों रुपए की चल-अचल संपत्ति के एकमात्र और वास्तविक मालिक स्वयं भगवान श्रीराम हैं। कोर्ट ने व्यवस्था दी कि इस देवस्थान का पूर्ण नियंत्रण और प्रबंधन मध्य प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग (कलेक्टर उज्जैन) के अधीन रहेगा।
हाईकोर्ट ने कहा कि 1930 में तत्कालीन महंत मुरलीदास की प्रार्थना पर ग्वालियर रियासत के औकाफ विभाग ने मंदिर नियंत्रण अपने हाथ में लिया था. तब से यह एक सरकारी देवस्थान बन चुका है। वादी रतनदास को औकाफ विभाग द्वारा 30 अप्रैल 1948 को जो पुजारी नियुक्त करने का आदेश जारी किया गया था. वह पूरी तरह वैध है और उनके उत्तराधिकारियों को पूजा का निरंतर अधिकार है। माहेश्वरी समाज के लोग इस ऐतिहासिक मंदिर के अनन्य और परम श्रद्धालु हैं, जिन्होंने मंदिर परिसर के विकास में लाखों रुपए खर्च किए हैं। चूंकि वे आस्थावान भक्त हैं, इसलिए वादी की उन्हें मंदिर में प्रवेश से रोकने के लिए दी गई स्थायी निषेधाज्ञा की मांग खारिज की जाती है। समाज के लोग मंदिर में आकर श्रद्धापूर्वक दर्शन और पूजा कर सकेंगे।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जिला कोर्ट की कई भूलों को भी साफ किया है:-
Updated on:
26 Aug 2026 11:43 am
Published on:
26 Aug 2026 11:43 am
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