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300 साल पुराना है इंदौर का गणेशोत्सव, पुणे से भी पहले होने लगी सार्वजनिक स्थापना

Indore Ganeshotsav : इंदौर में 1720 से शुरु हुई परंपरा, भारत में गणेशोत्सव की परंपरा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में शुरु की थी
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Indore ganeshotsav is over 300 years old

Indore ganeshotsav is over 300 years old (Photo AI Image)

Ganeshotsav : देशभर की तरह एमपी में भी गणेशोत्सव की धूमधाम शुरु हो गई है। बाजारों में गणेशजी की प्रतिमाएं लेने के लिए दुकानों पर भक्तों की भीड़ लगी है। सोमवार को विधिविधान से स्थापना और पूजन पाठ के साथ 10 दिनों का यह उत्सव प्रारंभ हो जाएगा। भाद्रपद मास की चतुर्थी से चतुर्दशी तक चलनेवाला यह उत्सव कमोबेश पूरे देश में मनाया जाता है हालांकि मुंबई और पुणे का गणेशोत्सव विशेष रूप से विख्यात है। एमपी में भी इंदौर का गणेशोत्सव विश्वप्रसिद्ध है। खास बात यह है कि यहां करीब 300 साल पहले ही सार्वजनिक गणेश उत्सव की शुरुआत हो गई थी। इस बीच विख्यात खजराना मंदिर में गणेशोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

इंदौर में सार्वजनिक गणेशोत्सव 1720 से मनता आ रहा है। पेशवाओं ने इसकी शुरुआत की थी। सार्वजनिक गणेश उत्सव के मौके पर राजवाड़ा पर दही हांडी का भी आयोजन किया जाता था।

इतिहासकारों के मुताबिक पुणे के पेशवाओं ने जब अपने मराठा साम्राज्य का विस्तार करना चालू किया तो सन 1711 में इंदौर को एक सूबा बना लिया। तब से ही सार्वजनिक रूप से गणेश चतुर्थी मनाई जाने लगी। 1720 में होलकर राजवंशी ने गणेशोत्सव को भव्य रूप दिया। इंदौर में होलकरों द्वारा शुरु किया गया यह उत्सव आज विशाल स्तर पर मनाया जाने लगा है।

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1893 सार्वजनिक गणेश उत्सव की शुरुआत की थी जबकि इंदौर में इससे बहुत पहले से यह प्रारंभ हो चुका था। होलकर राजपरिवार के वंशज सरदार उदयसिंह राव होलकर के अनुसार होलकर राजवंश ने अपनी जड़ें जमाने के साथ ही गणेशजी को पूरी निष्ठा और उल्लास के साथ याद करना शुरु किया। इंदौर के गणेशोत्सव के लिए शिवाजीराव होलकर प्रथम और तुकोजीराव होलकर द्वितीय विशेष रूप से याद किए जाते हैं। दोनों शासकों ने गणेश उत्सव पर कई पहल की।

दही हांडी का आयोजन भी कराया

शिवाजीराव होलकर प्रथम और तुकोजीराव होलकर द्वितीय ने सार्वजनिक गणेशोत्सव पर भजन के कार्यक्रम कराए। इतना ही नही, दही हांडी का आयोजन भी कराया। राजवाड़े पर गणेश चतुर्थी के दिन दही-हांडी बांधी जाती थी। सन 1995 तक यह सिलसिला चलता रहा।

गणेशजी को भी होलकरी पगड़ी में सजाया जाता

जूनी इंदौर में खरगोणकर परिवार ने गणेश मूर्तियां बनाने की शुरुआत की। वाड़े में यहीं से प्रतिमा लाई जाती थी। गणेशजी की पालकी निकलती थी। इसमें 32 वादकों का बैंड भी शामिल रहता था जोकि होलकर राज्य की धुन बजाता था। गणेशजी को भी होलकरी पगड़ी में सजाया जाता था। वाड़े में गणेशजी की मूर्ति को गणेश हाल में स्थापित किया जाता था ताकि आमजन इसका दर्शन कर सके। होलकर परिवार की पूजा के लिए एक अन्य मूर्ति स्थापित होती थी।

गणेशोत्सव के दौरान खजराना मंदिर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम

खजराना मंदिर के कपाट 13 सितंबर को रातभर खुले रहेंगे। भगवान गणेश का 6 करोड़ रुपए के स्वर्ण आभूषणों से भव्य श्रृंगार किया जाएगा। उन्हें सवा लाख मोदकों का महाभोग लगाया जाएगा। गणेशोत्सव के दौरान मंदिर में विशेष दर्शन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।