
लोगों में सर्दी-खांसी, बदन दर्द, बुखार और कमजोरी की शिकायत (फोटो सोर्स: Patrika)
Mhow News :मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में स्थित डॉ. आंबेडकर नगर (महू) में मानसून के बदले पैटर्न का असर लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। कभी तेज बारिश और फिर कई दिनों का लंबा ब्रेक, उसके बाद तेज धूप और बढ़ता तापमान मौसमी बीमारियों के लिए अनुकूल स्थिति बना रहा है। इसका असर शहर के मध्य भारत अस्पताल समेत प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी में दिखाई दे रहा है। सर्दी, खांसी, बुखार, डायरिया, सिरदर्द, हाथ-पैरों में दर्द, बदन दर्द, कमजोरी और सूखी खांसी की शिकायत लेकर मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।
मध्य भारत अस्पताल की ओपीडी में मौजूदा समय में रोजाना करीब 400 से 500 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पताल प्रभारी डॉ. अमित सोनी के अनुसार, इनमें आधे से अधिक मरीज वायरल और मौसम से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित आ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं।
डॉ. सोनी ने बताया कि, मानसून में लगातार बदलाव से वातावरण में गर्मी और उमस बढ़ रही है। कभी बारिश और कभी तेज धूप के कारण शरीर को तापमान के अनुसार ढलने में परेशानी हो रही है। मौसम के इस बदलाव का असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से कमजोर लोगों पर अधिक पड़ रहा है। नमी और जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के पनपने के लिए भी अनुकूल स्थिति बना रहे हैं। इससे मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। साथ ही दूषित पानी और खुले खाद्य पदार्थों के सेवन से डायरिया और पेट संबंधी संक्रमण की आशंका भी बनी हुई है। डॉ. सोनी ने बताया कि मौसम के इस दौर में खानपान और साफ-सफाई को लेकर थोड़ी भी लापरवाही बीमारी का कारण बन सकती है।
मौसमी बीमारियों के साथ फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। आम दिनों में जहां प्रतिदिन करीब 15 से 20 मरीजों की सामान्य इन्फ्लूएंजा जांच की जाती थी, वहीं वर्तमान में ये संख्या बढ़कर रोजाना करीब 40 से 50 तक पहुंच गई है। यानी जांच का आंकड़ा दोगुने से भी अधिक हो चुका है। डॉ. सोनी के अनुसार, सर्दी, खांसी और बुखार फ्लू के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। यदि ये लक्षण लगातार बने रहें तो चिकित्सक की सलाह लेकर स्वाइन फ्लू समेत अन्य जरूरी जांच करानी चाहिए। शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान होने से समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है।
मध्यभारत अस्पताल के प्रभारी डॉ. अमित सोनी के अनुसार, वायरल संक्रमण आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्तितक फैल सकता है। ऐसे में संक्रमित व्यक्ति को सामान्य लोगों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। खांसते और छींकते समय मुंह ढंकना जरूरी है और बीमार व्यक्ति को मास्क का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाहर और खुले खाद्य पदार्थों से परहेज करें। भोजन और पानी की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें। घर के आसपास दूषित पानी जमा नहीं होने दें और मक्खी-मच्छरों से बचाव के उपाय करें।
दो साल से कम उम्र के बच्चों और 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को इस मौसम में विशेष सावधानी की जरूरत है। इनमें संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। सांस लेने में दिक्कत छाती में दर्द, मांसपेशियों में तेज दर्द या तेज बुखार जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय उपचार लेना चाहिए। बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह से उपचार शुरू करने पर बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
वायरल संक्रमण से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता सबसे जरूरी है। हाथों को बार-बार साबुन और पानी से करीब 20 सेकंड तक धोना चाहिए। जरूरत पडऩे पर सेनेटाइजर का उपयोग किया जा सकता है। गंदे हाथों से आंख, नाक और मुंह को छूने से बचना चाहिए। भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। पर्याह्रश्वत मात्रा में पानी पिएंए पौष्टिक भोजन लें और रोजाना करीब 6 से 7 घंटे की नींद जरूर लें ताकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर बनी रहे। संक्रमित होने पर घर में रहकर चिकित्सक के मार्गदर्शन में पूरा उपचार लेना चाहिए ताकि संक्रमण दूसरे लोगों तक न पहुंचे।
मध्य भारत अस्पताल प्रभारी डॉ. अमित सोनी का कहना है कि, वर्तमान मौसम में सर्दी, खांसी, बुखार और वायरल संक्रमण के मरीज बढ़े हैं। लगातार लक्षण बने रहने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। खुले खाद्य पदार्थों से बचें, हाथों की सफाई रखें और मच्छरों से बचाव करें। छोटे बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
Updated on:
30 Aug 2026 11:08 am
Published on:
30 Aug 2026 11:08 am
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