
KBC की हॉट सीट पर CLAEN INDORE , अमिताभ बच्चन नहीं बचा सके 12.50
सुधीर पंडित @ इंदौर. कौन बनेगा करोड़पति ( KBC ) के हमारे 'कर्मवीरों को सलाम' कार्यक्रम में बुधवार को इंदौर निगमायुक्त आशीष सिंह और उनके साथ स्वच्छता अभियान के जनक डॉ. बिंदेश्वर पाठक ने प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन के 12 प्रश्नों का जवाब दिया। केबीसी की हॉट सीट पर बैठे इंदौर निगमायुक्त आशीष सिंह और डॉ. पाठक ने तीन लाइफ लाइन का उपयोग कर साढ़े 12 लाख जीते। जीती गई राशि में से डॉ. पाठक ने इंदौर नगर निगम को आधी राशि देने की घोषणा भी की।
गांधी जयंती के उपलक्ष्य में सोनी टीवी पर चल रहे कौन बनेगा करोड़पति के स्वच्छता अभियान में देश में नंबर वन आने पर इंदौर के निगमायुक्त से महात्मा गांधी व भारत के संविधान को लेकर प्रश्न किए। इस दौरान इंदौर नंबर वन कैसे बना इस बारे में भी बातें हुई। लगभग डेढ़ घंटे चले विशेष एपिसोड में सिर्फ 12 प्रश्र ही हुए और 13वें प्रश्न के पहले ही हुटर बज गया।
पहली लाइफ लाइन छठे प्रश्र पर ओडियंस पोल ली गई, जो फिल्मी गाने पर आधारित था। उसके बाद ही सांतवे प्रश्र पर भी एक्सपर्ट एडवाइज की दूसरी लाइफ लाइन लेना पड़ी। 9वें प्रश्र पर तीसरी लाइफ लाइन लेकर प्रश्र बदला। हालांकि शंका होने पर डॉ. पाठक और आशीष सिंह सही जवाब नहीं दे पाए थे।
13 लाख टन का कचरे का पहाड़ हटाया
निगमायुक्त आशीष सिंह ने अमिताभ बच्चन को स्वच्छता में नंबर वन आने पर जानकारी देते हुए बताया कि हमारे इंदौर में 13 लाख टन का कचरे का जो पहाड़ जमा था उसको अलग-अलग कर कुछ ही माह में खत्म कर दिया। कचरे का पहाड़ हटाकर वहां पेड़ लगाए और गार्डन बना दिया। वहीं दो बायोगैस प्लांट बनाकर 1400 टन सीएमजी गैस का उत्पादन किया जिससे 22 बसें संचालित हो रही है। उन्होंने बताया कि शहर को सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग नहीं करने को लेकर शुरू की गई बर्तन बैंक व झोला बैंक किस तरह से सफल रही।
माईक से की लाइव कामेंट्री
शहर को ओडीएफ करने के लिए तैयार किए गए मॉडल के बारे में जब निगमायुक्त ने बताया तो अमिताभ भी अचंभित हो गए और उन्होंने मुंबई को भी स्वच्छ करने के लिए सवाल कर दिया। निगमायुक्त ने बताया कि पीक टाईम में खुले में शौच पर जाने वालों को रोकने के लिए एक टीम बनाई जो ढोल व थाली बजाकर लोगों को भगाती थी। वहीं बच्चों की वानर सेना बनाई जो सिटी बजाकर लोगों को रोकती थी। मैदान के बगल में घर की छत पर खड़े होकर लाइव कामेंट्री सुनाई जाती थी, जिससे शर्म के कारण लोग खुले में शौच करने जाने पर रूक नहीं पाते थे।
हमारे गांधी तो पाठक है
सुलभ शौचालय की प्रेसीडेंट उषा शर्मा ने बताया बचपन में हम अपनी मां के साथ मेला ढोने जाते थे। जब डॉ. पाठक अलवर राजस्थान आए तो उन्होंने हमारे लिए एक संस्था खोल मेला ढोने की प्रथा को बंद करवाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा। हमने गांधी जी को तो देखा नहीं पर पाठकजी में देखा वो ही हमारे गांधीजी है। वो हमारे भगवान है।
अछूत को छुआ तो खिलाया गोबर
स्वच्छता अभियान के जनक डॉ. बिंदेश्वर पाठक ने कहा हमारे घर में एक महिला बांस का सामान लेकर आती थी तो मेरी दादी पूरे स्थान पर पानी छींटती थी। हमने दादी से पूछा तो उन्होंने बताया कि महिला अछुत है और धरती अपवित्र हो गई है। एक बार मैंने अछूत महिला को छू लिया तो पूरे परिवार में कोहराम मच गया। पंडित से उपाय पूछा तो उन्होंने बताया कि गाय का मूत्र और गोबर खिलाकर गंगा जल से स्नान करवाना होगा। परिवार ने प्रक्रिया भी पूरी की। यह बात मेरे जहन में थी और गांधीजी से मिला तो उन्होंने मुझे काम करने की बात कहीं। गांधीजी का सपना पूरा करने की ठान ली। जब काम शुरू किया तो माता-पिता भी दुखी थे। सबसे ज्यादा तो ससुराल वाले दुखी रहे। एक दिन तो ससुराल वालों ने गुस्से में यह तक कह दिया कि मेरा चेहरा तक नहीं देखना चाहते। तब मैनें उन्हें कहा कि गांधीजी का सपना पूरा करना है। जब तक पूरा नहीं होता है तब तक आपकी लडक़ी ( पत्नी) का आप ध्यान रखें।
मेरा सरनेम किसी जाति का नहीं
प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन ने बताया कि अछूत व जात-पात मेरे बाबूजी के समय भी मैने देखा। शौच साफ करने वालों को अछूत समझा जाता था। इससे दुखी होकर मेरे पिता ने बच्चन सरनेम का जन्म किया। मेरा सरनेम किसी जाति के साथ नहीं जुड़ा है। मुझे गर्व है कि मैं उस नाम का प्रथम प्राणी हूं। स्कूल में एडमिशन के समय सरनेम की स्थापना हुई। मेरी जाति भारतीय है।
ये थे प्रश्र
Updated on:
03 Oct 2019 12:29 pm
Published on:
03 Oct 2019 12:24 pm
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