
Mount Everest
इंदौर। "म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के?" दंगल फिल्म के इस डायलॉग को सच कर दिखाया है इंदौर की खुशबू खत्री ने। खुशबू ने यह कारनामा तब कर दिखाया जब उनके लिगामेंट (पांव के घुटने में समस्या) चोट लगी थी व जिसकी सर्जरी होनी थी। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी और फतह कर दी 5364 मीटर ऊंची काला पत्थर यानी दुनिया की सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप। -30 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच खुशबू ने यह कारनामा कर दिखाया है। इंदौर के अन्नपूर्णा क्षेत्र में रहने वाली खुशबू खत्री फिलहाल बैंगलुरू में फैक्टल एनालिटिक्स में डाटा इंजीनियर है।
65 प्रतिशत था ऑक्सीजन स्तर
काला पत्थर की चोटी को फतह करने वाली खुशबू ने बताया कि हमने 1 जनवरी 2023 की सुबह 3:30 बजे काला पत्थर के लिए चढ़ाई भी शुरू की, -30 डिग्री सेल्सियस तापमान और 65 प्रतिशत ऑक्सीजन स्तर और बहुत ठंडी हवाओं का सामना करते हुए। इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, मैं चढ़ाई पूरी करने में सक्षम रही। यही नहीं हमने अपने दोस्तों को काला पत्थर की चोटी तक पहुंचने में मदद भी की, जो 18519 फीट/5644 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस पूरी यात्रा में 12 दिन लगे और मैने 140 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की। यह वास्तव में एक उल्लेखनीय उपलब्धि थी और मुझे अपने पर बहुत गर्व है।
मार्च 2022 में होनी थी सर्जरी
माउंट एवरेस्ट पर जाने के लिए मुझे जिसने प्रेरित किया, यह भी एक दिलचस्प कहानी है। मार्च 2022 में मेरे लिगामेंट में चोट लगी तो मैंने ‘आपदा को अवसर में बदलने’ के लिए प्रधान मंत्री के वाक्य से प्रेरणा ली। पता चला कि मुझे लिगामेंट टियर है और मार्च 2022 में मेरी सर्जरी होनी थी। इसके बाद, मेरे आसपास के लोगों ने मुझे बताया कि मैं शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले सकती, जो मुझे बहुत पसंद है।
जब माउंट एवरेस्ट आधार शिविर पर चढ़ने का अवसर आया, तो मुझे लगा कि यह न केवल दूसरों को दिखाने का, बल्कि खुद को साबित करने का सही मौका है कि मैं अब भी कुछ भी हासिल करने में सक्षम हूं। मैं देश भर की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बनना चाहती थी, और उन्हें यह साबित करना चाहती थी कि अगर हम अपना दिमाग लगाते हैं तो हम बड़ी ऊंचाइयों को हासिल करने में सक्षम हैं।
Published on:
24 Jan 2023 04:50 pm
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