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1 लाख से ज्यादा डिलेवरी करा चुकी पद्मश्री डॉक्टर भक्ति यादव का निधन

आखिरी सांस तक अपने पेशे से जुड़ी रहीं डॉक्टर यादव ने सोमवार को अपने निवास पर आखिरी सांस ली। वे कुछ समय से बीमार चल रही थीं। 
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dr. bhakti yadav

इंदौर। उम्र 91 की वजन सिर्फ 26 किलो, लेकिन जज्बा पहाड़ को भी मात दे दे जी हां ये थीं, 1 लाख से ज्यादा महिलाओं की सामान्य डिलेवरी करवाने वाली पद्मश्री डॉक्टर भक्ति यादव। आखिरी सांस तक अपने पेशे से जुड़ी रहीं डॉक्टर यादव ने सोमवार को अपने निवास पर आखिरी सांस ली। वे कुछ समय से बीमार चल रही थीं।

मध्यप्रदेश की पहली महिला रोग विशेषज्ञ

1 लाख से ज्यादा डिलिवरी कराने वालीे पद्मश्री डॉक्टर भक्ति यादव का सोमवार निधन हो गया। वे 91 वर्ष की थीं। इस वर्ष ही उन्हें हाल ही में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से बीमार चल रहीं थी, लेकिन इस दौरान उन्होंने मरीजों को देखना नहीं छोड़ा था डॉक्टर भक्ति यादव के नाम 64 साल में एक लाख से ज्यादा महिलाओं की डिलिवरी कराने का अनोखा रिकॉर्ड भी था। साथ ही वे इंदौर के महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की पहली महिला डॉक्टर थीं उन्हें मध्यप्रदेश की पहली महिला रोग विशेषज्ञ माना जाता है।

सेवा की प्रतिमूर्ति

उनसे जुडे लोगों का कहना है कि वे सन् 1948 से ही निशुल्क उपचार कर रही थीं। वे प्रसव कराने के लिए भी कोई शुल्क नहीं लेती थीं डॉक्टर भक्ति यादव का जन्म उज्जैन जिले के महिदपुर में 3 अप्रैल 1926 को हुआ था। वे परदेशीपुरा में अपने वात्सल्य नर्सिंग होम का संचालन करती थीं। भक्ति यादव की सेवा और समर्पण से कई महिलाओं ने डॉक्टर की बजाए अपनी मां का दर्जा दिया था। उन्हने सेवा की प्रतिमूर्ति के रूप में जाना जाता है।उनके निधन की खबर से सभी लोगो को गहरा धक्का लगा है।

एमबीबीएस की पहली बैच की पहली महिला छात्रा
डाक्टर भक्ति यादव महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (एमजीएम) में एमबीबीएस की पहली बैच की पहली महिला छात्रा थीं। 1952 में एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बाद 1964 में यहीं से एमएस भी किया।उस दौर में भंडारी कपड़ा मिल ने नंदलाल भंडारी प्रसुतिगृह के नाम से महिलाओं के लिए एक अस्पताल खोल रखा था। वे यहां बतौर स्त्रीरोग विशेषज्ञ काम करने लगीं। 1978 में अस्पताल बंद होने के बाद उन्होंने अपने घर को ही नर्सिंग होम बना दिया और नाममात्र की फीस पर महिलाओं का इलाज शुरू कर दिया। पिछले 20 सालों से वे बिना किसी फीस के इलाज कर रही थी।केंद्र सरकार ने उनकी इस उपलब्धि को देखते ही हाल ही में उन्हें पद्मश्री से नवाजा था।