
इंदौर। कोरोना काल में टेक्नोलॉजी ने देश-दुनिया में बड़े-बड़े बदलाव ला दिए। रविवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इंदौर में ‘बदलते परिदृश्य में कोर्ट टेक्नोलॉजी और न्याय तक पहुंच’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया।
इसका शुभारंभ करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एएम खानविलकर ने कहा, वर्चुअल सुनवाई और ई-फाइलिंग जैसी ऑनलाइन टेक्नोलॉजी ने न्यायिक प्रक्रिया को आसान बना दिया है। युवा वकील इसका उपयोग करेंगे तो आम आदमी के लिए न्याय तक पहुंच आसान होगी।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी ने कहा, मप्र में ये बदलाव 2013 से ही शुरू कर दिए गए थे। वर्तमान में देशभर का सर्वश्रेष्ठ सिस्टम प्रदेश के पास है। हालांकि इसके उपयोग में प्रदेश पीछे है।
इसकी खास वजह वकील व फरियादी की इस व्यवस्था तक पहुंच नहीं होना है। बार काउंसिल इस काम को करेगी तो प्रदेश, देश का पहला राज्य बन जाएगा।
बीसीआइ द्वारा बीसीसी में आयोजित सेमिनार में देशभर से आए हाईकोर्ट बार काउंसिल के पदाधिकारी, वकीलों और विधि छात्रों ने हिस्सा लिया। शुभारंभ व समापन के साथ दो सत्रों में कोर्ट टेक्नोलॉजी और न्याय तक पहुंच विषय पर पांच हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों ने विचार-विमर्श किया।
मोबाइल क्रांति का उपयोग करें: जस्टिस खानविलकर ने कहा, देश में मोबाइल टेक्नोलॉजी गांवों तक पहुंच चुकी है। इससे पक्षकार के मोबाइल पर सूचनाएं जाने लगेगी, फैसले ऑनस्क्रीन रहेंगे तो कागज की बचत होगी, जिससे पेड़ बचेंगे, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।
जस्टिस माहेश्वरी ने बताया, महामारी काल में देशभर में वर्चुअली 1.23 करोड़ केस की सुनवाई की गई। सुप्रीम कोर्ट में 2.18 हजार, हाईकोर्ट में 67.28 लाख मामले सुने गए। शेष लोअर कोर्ट के हैं। इसमें मप्र का हिस्सा देखें तो हाईकोर्ट में 6.37 लाख व जिला कोर्ट में 6.73 लाख मामलों पर सुनवाई की गई। यह दर्ज व लंबित मामलों के अनुपात में कम है।
Published on:
09 May 2022 09:08 am
