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कर्ज में डूबी 70 बिजली कंपनियां, दिवालिया होने का खतरा संपत्ति हो सकती है सीज

देश की तकरीबन 70 बिजली कंपनियां इस वक्त बुरी तरह से कर्ज में डूबी हैं। इतना ही नहीं ये कंपनिया दिवालिया होनो की कगार पर हैं।
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नई दिल्ली। देश की तकरीबन 70 बिजली कंपनियां इस वक्त बुरी तरह से कर्ज में डूबी हैं। इतना ही नहीं ये कंपनिया दिवालिया होनो की कगार पर हैं। इन कंपनियों ने बैंकों से करीब 4 लाख करोड़ रुपए तक का लोन ले रखा हैं। ऐसे में आरबीआई इन कंपनियों पर करवाई करना चाहती हैं अगर ऐसा होता है तो देश में भारी बिडली संकट आ सकता हैं। बैंक ने इन कंपनियों को कर्ज चुकाने के लिए 6 महीने का वक्त दिया था जो खत्म गया है।तो वहीं दूसरी तरफ पावर कंपनियों और समय मांगने के लिए इलाहाबाद हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन एनपीए मामले में इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कोई भी राहत देने से इंंनकार कर दिया हैं।

कर्ज में डूबीं है 70 कंपनियां
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रिजर्व बैंक ने फरवरी 2018 में एक सर्कुलर में स्पष्ट किया था कि कर्ज में डूबीं 70 कंपनियां इसे चुकाने में देरी करती हैं तो उसे डिफॉल्टर मान कर उनके कर्ज ली गई रकम को एनपीए (फंसा लोन) घोषित कर दिया जाएगा। इसे तकनीकी भाषा में 'वन डे डिफॉल्ट नॉर्म' कहते हैं। यह 1 मार्च 2018 से लागू हो गई थी। बैंकों को ऐसे सभी पिछले मामलों को सुलझाने के लिए 1 मार्च 2018 से 180 दिनों का वक्त दिया गया था जो सोमवार 27 अगस्‍त को पूरा हो गया। इस दौरान कंपनियों और बैंकों के बीच जो मामले नहीं सुलझे उन सभी कंपनियों के खातों को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

बैंक ने दिया 15 दिन का समय
बता दें कि आरबीआई ने इन 70 कंपनियों को 15 दिन का समय दिया है ताकि वे अपना वकील और रिजॉल्‍यूशन प्रोफेशनल एप्‍वाइंट कर सकें। अगर इन 15 दिन में कंपनियों कोई समाधान पेश करती हैं और वह सभी कर्ज देने वाले बैंकों को मंजूर होता है तो वो कर्ज लेने वाले कंपनियों पर दिवालिया होने की कारवाई करेगीं। इतना ही नहीं इन कंपनियों की संपत्ति को भी सीज किया जा सकता हैं। बता दें जिंदल, जेपी पॉवर वेंचर, प्रयागराज पॉवर, झबुआ पॉवर, केएसके महानंदी समेत कई और बिजली कंपनीयां कर्ज में डूबी हैं।