AGR मामले में DoT का टेलीकॉम कंपनियों को नोटिस, रकम चुकाने का दिया निर्देश

  • टेलीकॉम कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चुकाने हैं 92 हजार करोड़ रुपए
  • सुप्रीम ने एजीआर चुुकाने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को दिए थे 3 महीने

नई दिल्ली। एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू ( Agr ) मामले में टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने टेलीकॉम कंपनियों को नोटिस जारी कर दिया है। बीते दो दिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि टेलीकॉम डिपार्टमेंट कभी कंपनियों को नोटिस भेज सकता है। डिपार्टमें ने अपने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी कंपनियों से रकम चुकाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ले सभी कंपनियों को तीन महीने के अंदर रकम चुकाने के निर्देश जारी किए हुए हैं। वहीं डिपार्टमेंट ने अपने नोटिस में सभी कंपनियों को एजीआर से जुड़े सभी डॉक्युमेंट्स भी जमा कराने का निर्देश दिया है। वहीं सभी कंपनियों को अपने कर्ज का सेल्फ एसेसमेंट करने को भी कहा गया है।

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सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्टूबर को आठ टेलीकॉम कंपनियों को जबरदस्त फटकार लगाते हुए बकाया चुकाने के निर्देश जारी किए हैं। जिसके बाद कंपनियों को मूल रकम के साथ उसका ब्याज भी चुकाना होगा। खास बात ये है कि इस फेहरिस्त में वो कंपनियां भी जो मौजूदा समय में बंद हो गई हैं। देश की आठ कंपनियों पर एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) के रूप में 92,000 करोड़ रुपए की रकम बकाया है। वहीं कोर्ट ने टेलीकॉम डिपार्टमेंट द्वारा तय की गई एजीआर की परिभाषा को बरकरार रखा था। कोर्ट के अनुसार बकाया भुगतान की गणना के लिए समय की अवधि तय होगी।

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किस कंपनी पर कितना बकाया
आंकड़ों की मानें तो भारती एयरटेल 21,682.13 करोड़ रुपए का बकाया है। वहीं वोडाफोन को 19,823.71 करोड़ रुपए चुकाने होंगे। वहीं बंद हो चुकी रिलायंस कम्युनिकेशंस पर 16,456.47 करोड़ रुपए बकाया है। वहीं सरकारी कंपनी बीएसएनएल को 2,098.72 करोड़ रुपए बकाया के तौर पर चुकाने हैं। दूसरी सरकारी कंपनी एमटीएनएल को 2,537.48 करोड़ रुपए चुकाने होंगे। आपको बता दें कि टेलीकॉम डिपार्टमेंट की ओर से जुलाई में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर टेलीकॉम कंपनियों पर बकाया लाइसेंस फीस की जानकारी दी थी। कुल 92,641.61 करोड़ रुपए का बकाया बताया गया था।

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कुछ ऐसा है एजीआर विवाद
टेलीकॉम कंपनियों को एजीआर के आधार पर ही सरकार को स्पेक्ट्रम और लाइसेंस फीस चुकानी होती है। कंपनियां अभी टेलीकॉम ट्रिब्यूनल के 2015 के फैसले के आधार पर एजीआर की गणना करती हैं। इसके तहत वे अपने अनुमान के आधार पर स्पेक्ट्रम शुल्क और लाइसेंस फीस चुकाती हैं। दूरसंचार विभाग लगातार बकाया की मांग करता रहा है। दूरसंचार विभाग ने कहा था कि एजीआर में डिविडेंड, हैंडसेट की बिक्री, किराया और कबाड़ की बिक्री भी शामिल होनी चाहिए। टेलीकॉम कंपनियों की दलील थी कि एजीआर में सिर्फ प्रमुख सेवाएं शामिल की जाएं। इस मामले में अदालत ने अगस्त में फैसला सुरक्षित रखा था।

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Saurabh Sharma Desk/Reporting
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