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CAIT से मन की बात, निशाने पर गुजरात! आइए जानते हैं अंदर की कहानी

CAIT से 'मन की बात' की सच्चाई हीरा कोराबरी से कपड़ा कारोबारी तक परेशान 7 करोड़ वोट बैंक पक्ष में करने की पुरजोर कोशिश
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CAIT PM

CAIT से मोदी के ‘मन की बात’, निशाने पर था गुजरात, कारोबारियों के वोट बैंक की है ये हकीकत

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मोदी ने कल दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में हजारों कारोबारियों के सामने अपने 5 साल के किए गए कामों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। उन्होनें अपने कार्यकाल मे शुरु किए गए हर स्कीम के एक एक दिन का हिसाब कारोबारियों को दिया। उज्जवला योजना, डीबीटी स्कीम, मुद्रा योजना समेत कई ऐसी स्कीम हैं जिनका ब्योरा पीएम मोदी ने कारोबारियों को दिया। लेकिन सवाल उठता है कि जहां मोदी खुले में 56 इंच का सीना दिखाते हैं, तो वहीं चुनावों के दौरान ऐसी क्या जरुरत आन पड़ी कि दिल्ली के इंडोर स्टेडियम में उन्हें अपने काम का बखान कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के तहत किए गए कार्यक्रम में आकर बताना पड़ा। आइए जानते हैं इसकी पूरी हकीकत

7 करोड़ वोट बैंक का है सवाल

दरअसल कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के तहत इस चुनाव देश के 7 करोड़ व्यापारी एक होकर एक वोट बैंक के रूप में एकतरफा मतदान करेंगे । देश भर में 40 हज़ार से ज़्यादा व्यापारिक संगठन है जो कुल मिलकर देश के 7 करोड़ व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो लगभग 30 करोड़ से ज़्यादा लोगों को रोज़गार देते हैं और इस दृष्टि से यह देश का सबसे बड़ा वोट बैंक है। लाजिमी है कि कोई भी पार्टी इस चुनाव में इतना बड़ा वोट बैंक खोना नहीं चाहेगी।

गुजरात कनेक्शन की हकीकत

मामला गुजरात विधानसभा चुनावों का है, कारोबारियों के लिए देश का सबसे बड़ा रिफॉर्म कहलाने वाला जीएसटी गुजरात के कारोबारियों के लिए गले की फांस बन गया। फिर चाहे वो कपड़ा व्यापारी हो या हीरा कारोबारी, सबने खुल कर इसके दर्द मीडिया को बयां किए।

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कपड़ा कारोबार पर असर

गुजरात विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कपड़ा कारोबारियों ने जीएसटी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था, बड़ी संख्या में कपड़ा व्यापार से जुड़े लोग अपनी दुकानें और पावरलूम छोड़कर सड़क पर सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते रहे। गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होने से पहले कपड़ा उद्योग से सरकार को टैक्स नहीं जाता था। सूत की बात करें तो इसपर 18 फीसदी टैक्स लगा करता था लेकिन कपड़े को टैक्स फ्री बेचा करते थे। यानी कि इसके बाद कारीगर, निर्माता, थोक, खुदरा व्यापारी के क्रम में खुदरा व्यापारी को ही 5 फीसदी वैट चुकाना पड़ता था। जीएसटी को लेकर कारोबारियों में रोष इतना था कि एक लाख व्यापारी सड़क पर आ गए थे। कारोबारियों ने जमकर इसका विरोध किया और 22 दिन तक कपड़ा मार्केट बंद रहा था।

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क्या कहते हैं आंकड़े

वहीं हीरे की बात करें तो तराशे हीरे पर अधिक आयात शुल्क, और जीएसटी की रिफंड में देरी से देश के रत्नाभूषण निर्यात में वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान 3.12 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। उद्योग के शीर्ष संगठन रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के आंकडों के मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान भारत का 39.68 अरब डॉलर रहा जबकि पिछले साल 40.96 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था। अलबत्ता वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान भारत से तराशे हुए हीरों का कुल निर्यात 23.82 अरब के स्तर पर स्थिर रहा जो इससे पिछले वर्ष 23.72 अरब डॉलर के स्तर पर था।


















वित्त वर्ष


कुल रत्नाभूषण निर्यात
2017-1840.96 अरब डॉलर
2018-1939.68 अरब डॉलर
















वित्त वर्ष तराशे हीरे का निर्यात
2017-1823.82 अरब डॉलर
2018-1923.72 अरब डॉलर

हीरा कारोबारियों का विरोध

वन नेशन वन टैक्स की बात कर जिस जीएसटी को लागू किया गया, उसका विरोध हीरा कारोबारियों ने जमकर किया। तालकटोरा स्टेडियम के कार्यक्रम में मौजूद एक कारोबारी के मुताबिक विरोध का मामला इतना बढ़ चुका था कि सरकार को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। इसलिए cait जो किसी समय खुलकर इन नीतियों का विरोध करता था वो आज 7 करोड़ का वोट बैंक सरकार के पक्ष में करने की पुरजोर कोशिश में लगा है।

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