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मोदी सरकार का बड़ा फैसला: बंद होंगी पिछले दो साल में कोर्इ कारोबार नहीं करने वाली कंपनियां

मोदी सरकार ने उन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने का फैसला लिया है जिन्होंने पिछले दाे साल में कोर्इ भी करोबार नहीं किया है।

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मोदी सरकार का बड़ा फैसला: बंद होंगी पिछले दो साल में कोर्इ कारोबार नहीं करने वाली कंपनियां

नर्इ दिल्ली। नरेन्द्र मोदी की सरकार देश की मुखौटा कंपनियों को किसी भी किमत पर छोड़ना नहीं चाहती है। पहले से अौर अाक्रामक रूख अपनाते हुए सरकार ने फैसला किया है कि अब इन कंपनियों के रजिस्ट्रेशन को पूरी तरह से रद्द कर दिया जाएगा। दरअसल एेसी 25-30 फीसदी कंपनियां हैं जिनका रजिस्ट्रेशन को रद्द करने का निर्णय केन्द्र सरकार ने लिया है। सरकार ये कार्रवार्इ उन कंपनियों के खिलाफ करेगी जिनका पिछले दो साल से सालाना टर्नआेवर शून्य रहा है।


शून्य टर्नआेवर वाली कंपनियों का रजिस्ट्रेशन होगा रद्द

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, मिनिस्ट्री आॅफ काॅर्पोरेट अफेयर्स (MCA) कंपनीज एक्ट की धारा 248 में मौजूदा प्रावधानों का प्रयाेग करते हुए इन कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द करने की योजना बना रही है। इस प्रावधान के तहत उन कंपनियों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा जो कि पिछले दो साल से पूरी तरह से निष्क्रिय है। इन कंपनियों को 'डाॅरमेट कंपनियां' भी कहा जाता है। मंत्रालय ने ये साफ कर दिया है कि भले ही इन कंपनियाें ने अपना रिटर्न फाइल करने की अनिवार्यता का पूरा किया हो लेकिन यदि पिछले दो साल में इनका टर्नआेवर शून्य रहता है तो इन्हें पर कार्रवार्इ जरूर की जाएगी।

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क्या है कानून में प्रावधान

सूत्रों के मुातबिक, कंपनीज एक्ट की धारा 248 सरकार को ये अधिकार देता है। यदि कोर्इ कंपनी लगातार दो साल तक काेर्इ कारोबार नहीं करता तो उस कंपनी का रजिस्ट्रेशन बंद करने के लिए सरकार के पास पर्याप्त आधार है। इस कानून के मुताबिक, सरकार को इन कंपनियों को एक्शने लेने के लिए उनके निदेशकों को नोटिस देना होता है। सरकार के इस नोटिस पर कंपनियों आैर उनके निदेशकों को मात्र 30 दिन के अंदर जवाब देना होता है।


रिटर्न नहीं भरने के वजह से 2.25 लाख कंपनियों का रद्द हो चुका है रजिस्ट्रेशन

अगर कोर्इ कंपनी अपने गठन के एक साल के अंदर कोर्इ कारोबार शुरू नहीं करती या छह माह के अंदर कैपिटल सब्सक्रीप्शन नहीं बनाती है तो सरकार एेसी कंपनियों का नाम रजिस्टर्ड कंपनियों की लिस्ट से हटा सकती है। आपको बता दें कि, अभी तक सरकार ने एेसी 2.25 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर चुकी है जिन्होंने रिटर्न फाइल नहीं किय है। अब सरकार उन लाखों कंपनियों पर तलवार लटका रही है जिन्होंने पिछले दो साल से कोर्इ कारोबार नहीं किया है।

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हालांकि अभी तक ये आंकड़ा सामने नहीं पाया है कि एेसी कितनी कंपनियां है लेकिन एक अुनमान के मुताबिक एेसी 3-4 लाख कंपनियां हो सकती हैं। आपको बता दें कि दिसंबद 2017 तक जारी आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में कुल 17 लाख कंपनियां पंजीकृत थी। इन 17 लाख कंपनियों में से केवल 11.4 लाख कंपनियां ही सक्रिय है।