
नई दिल्ली। डीजिटल होते भारत में आजकल हर काम ऑनलाइन होने लगा हैं। फिर चाहे वो कपड़े खरीदना, सब्जियां लेना, इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीदारी करना या फिर बैंक का कोई काम करना हो आजकल सब कुछ लोग ऑनलाइन ही करने लगे हैं। जैसे-जैसे ऑनलाइन खरीदारी बढ़ती जा रही है वैसे - वैसे ऑनलाइन होने वाला फ्रॉड भी बढ़ता चला जा रहा हैं। अक्सर लोगों के साथ ऐसा होता है वो ऑनलाइन मंगाते कुछ है और आता कुछ हैं, या फिर नकली प्रोडक्ट मिल जाता हैं। हर दिन धोखाधड़ी के नए मामले सामने आ रहे हैं। सरकार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने और ई-कॉमर्स पर शिकंजा कसने के लिए एक अहम कदम उठाने जा रही हैं। सरकार मॉनसून सत्र उपभोक्ता संरक्षण विधेयक लाने की तैयारी में हैं.। इसके साथ ही मॉनसून सत्र के बाद नए नियमों के जरिए इन कंपनियों पर अंकुश लगाने की तैयारी चल रही है।
42 प्रतिशत बढ़ी धोखाधड़ी
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ शिकायतों के मामले पिछले एक साल में 42 प्रतिशत बढ़े हैं। इन कंपनियों को लेकर सरकार अपना रुख सख्त करने जा रही है। क्योंकि जितनी तेजी से ऑनलाइन का बाजार बढ़ा है, उतनी ही तेजी से धोखाधड़ी के मामले भी बढ़ रहे हैं। ई-कॉमर्स के लिए बनने जा रहे नए नियमों में इस बात का खास ख्याल रखा जाएगा कि ग्राहकों का भरोसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बना रहे। साथ ही पॉलिसी में घरेलू कंपनियों के हितों का भी खास ख्याल रखा जाएगा। वाणिज्य मंत्रालय ने एक थिंक टैक भी बनाया है, जो इस मामले में दिशानिर्देश तय करेगा। नए नियमों के तहत गलत या खराब सामान बेचने पर दो सप्ताह में कंज्यूमर को रिफंड देना होगा और 30 दिन में उसकी शिकायत दूर करनी होगी।
शिकायत करने के लिए नए नियम होगें आसान
ई-कॉमर्स पॉलिसी में ग्राहकों का खास ख्याल रखा जाएगा। नकली प्रोडक्ट या दूसरी धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसके अलावा रजिस्टर से पहले कंपनी को पूरी जानकारी साइट पर देनी होगी। ग्राहकों की शिकायतों के लिए एक डायरेक्ट नंबर मुहैया कराना होगा। नए नियमों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया को बहुत सरल किया जाएगा जिस से की ग्राहकों को परेशानियों को सामना ना करना पड़े और कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़े।
वेबसाइट पर देनी होगी पूरी जानकारी
अब तक प्रोडक्ट्स के ऊपर उसकी कीमत, मैन्यूफ्रेक्चर की तारीख और बाकी जानकारी लिखी रहती थी, लेकिन अब वेबसाइट पर भी पूरी जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही कंपनियों को बेचे जा रहे प्रोडक्ट की पूरी जानकारी देनी होगी। प्रोडक्ट की एमआरपी, कहां प्रोडक्ट बना है, सेल प्राइस है और ऑरिजिनल प्राइस भी बताना होगा।इतना ही नहीं नए नियमों के तहत गलत या खराब सामान बेचने पर दो सप्ताह में कंज्यूमर को रिफंड देना होगा और 30 दिन में उसकी शिकायत दूर करनी होगी।
वेबसाइट पर विक्रेता की पूरी जानकारी देनी होगी
इस वक्त ई-कॉमर्स कंपनियां वेबसाइट पर सिर्फ विक्रेता नाम बताती है। लेकिन अब से सामान मुहैया कराने वाले विक्रेता की पूरी जानकारी देनी होगी। ई-कॉमर्स कंपनियां थर्ड पार्टी कहकर या उनका नाम लगा कर बच नहीं सकती सकती हैं। अगर कोई भी सामान जो की ग्राहका को दिया गया है वो टूटा- फूटा, उसकी क्वालिटी ठीक नहीं या सामान गलत दिया गया हैं। तो यह ई-कॉमर्स और विक्रेता दोनों की इसके लिए जिम्मेदार मानें जाएंगे।
गलत जानकारी देना होगा कानूनी अपराध
नए नियमों के अनुसार किसी सामान के बारे में गलत जानकारी देना, उनको गलत रुप से पेश करना बढ़ा चढ़ाकर सामान के बारे में बताना या झूठे ग्राहकों के जरिए सामाने के बारे में अच्छा-अच्छा लिखना कानूनी तौर पर गलत माना जाएंगा। प्रतिस्पर्धी से मुकाबले के लिए सामान को नए या गलत नाम से बेचना भी कानूनी तौर पर अपराध के दायरे में होगा।
14 दिन में देना होगा रिफंड
अभी तक सिर्फ एक ईमेल आईडी पर शिकायत दर्ज की जाती थी। लेकिन अब नए नियमों के मुताबिक एक से ज्यादा ईमेल आईडी पर शिकायत दर्ज की जाएंगी। बल्कि कंज्यूमर कहां शिकायत कर रहा हैं उसके हर कदम की पूरी जानकारी देनी होगी। नए नियमों में टूटा हुआ सामान, गलत, नकली या जैसा विवरण वेबसाइट पर दिया था, वैसा सामान नहीं होने पर उपभोक्ता को उसे लौटाने का अधिकार होगा। इस स्थिति में उपभोक्ता को 14 दिन में रिफंड देना होगा। कंपनी को वेबसाइट पर सामान लौटाने की पॉलिसी भी प्रदर्शित करना होगा।
Updated on:
31 Jul 2018 12:40 pm
Published on:
31 Jul 2018 10:34 am
