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बुरी खबर, रिलायंस की इस कंपनी के कर्ज को विजया बैंक ने किया एनपीए घोषित

अनिल अंबानी ग्रुप ने रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग को 2016 में खरीदा था, जिस पर अब दो दर्जन बैंकों का 9,000 करोड़ रुपए से अधिक बकाया है।
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Anil ambani

नई दिल्‍ली। कंफ्यूज होने की जरुरत नहीं है, रिलायंस की यह कंपनी मुकेश अंबानी की नहीं बल्कि अनिल अंबानी की है। पब्लिक सेक्टर के विजया बैंक ने अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनी रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग को दिए गए कर्ज को जनवरी-मार्च 2018 तिमाही में नॉन-परफॉर्मिंग एसेट घोषित किया है। रिलायंस नेवल के ऑडिटर्स ने इस कंपनी के वजूद को लेकर पहले ही आशंका जाहिर की थी। आपको बात दें कि पहले इस कंपनी का नाम पिपावाव डिफेंस एंड ऑफशोर इंजीनियरिंग था। अनिल अंबानी ग्रुप ने इस कंपनी को 2016 में खरीदा था और दो दर्जन बैंकों का 9,000 करोड़ रुपए से अधिक बकाया है। इस कंपनी को सबसे ज्‍यादा कर्ज आईडीबीआई बैंक ने दिया था।

आरबीआई के नियमों के अनुसार हुई कार्रवाई
विजया बैंक के अधिकारियों की मानें तो 12 फरवरी को रिजर्व बैंक के एनपीए रिजॉल्यूशन फ्रेमवर्क में बदलाव करने की वजह से उसे रिलायंस नेवल को दिए कर्ज को एनपीए कैटेगरी में डालना पड़ा। 12 फरवरी के निर्देश में आरबीआई ने सभी तरह की रिस्ट्रक्चरिंग पर रोक लगा दी थी और उसने बैंकों से कहा था कि कंपनी के एक दिन का भी डिफॉल्ट करने पर वे उसके रिजॉल्यूशन प्लान पर काम शुरू करें। आरबीआई ने कहा था कि अगर डिफॉल्ट करने वाली कंपनी उसके बाद 180 दिनों में बकाया रकम का भुगतान नहीं करती तो बैंक पैसे की वसूली के लिए दिवालिया अदालत जाएं।

कर्ज में डूबे अनिल अंबानी
रिलायंस नेवल अनिल अंबानी ग्रुप की दूसरी कंपनी है, जिसे दिया गया कर्ज एनपीए में बदल गया है। ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस पहले ही दिवालिया हो चुकी है और उसका मामला मुंबई की एनसीएलटी बेंच के सामने है। रिलायंस कम्युनिकेशंस पर 31 बैंकों के 45 हजार करोड़ रुपए बकाया हैं। रिलायंस नेवल पर 8,753.19 करोड़ रुपए का कर्ज मार्च 2017 तक था। मार्च 2018 तिमाही में कंपनी का घाटा तीन गुना बढ़कर 408.68 करोड़ रुपए हो गया, जो सालभर पहले की इसी तिमाही में 139.92 करोड़ रुपए था। वित्त वर्ष 2018 में कंपनी का घाटा 956.09 करोड़ रुपए रहा, जो इससे पिछली तिमाही में 523.43 करोड़ रुपए था। मार्च तिमाही में आईडीबीआई की अगुवाई में बैंकों के ग्रुप ने कंपनी को दिया गया लोन रिकॉल कर लिया था और उन्होंने अपने पास पड़े इसके गिरवी शेयर कब्जे में ले लिए थे।