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जबलपुर। मध्यप्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के मामले में शुक्रवार को एक साथ 55 याचिकाओं पर सुनवाई एक बार फिर टल गई। जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। क्योंकि वे महाधिवक्ता रहते हुए ओबीसी मामले में सरकार का पक्ष रख चुके थे। यह सुनवाई अब 4 अप्रैल को होगी।
जबलपुर हाईकोर्ट में शुक्रवार को ओबीसी आरक्षण को लेकर 55 याचिकाओं पर शुक्रवार को एक साथ सुनवाई शुरू हुई। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ और जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव की डिवीजन बैंच में यह सुनवाई होना थी। लेकिन, सुनवाई शुरू होने के साथ ही जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव ने इस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इसके बाद चीफ जस्टिस रवि मलिमथ ने सभी याचिकाओं को नई डिवीजन बेंच के लिए रेफर कर दिया। उस बेंच में जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव शामिल नहीं रहेंगे।
क्यों अलग हुए पुरुषेंद्र कौरव
जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव बतौर महाधिवक्ता ओबीसी आरक्षण के मामले में अपना पक्ष पहले ही रख चुके है। इसलिए ओबीसी संबधित याचिकाओं की सुनवाई से उन्होंने अपने आप को अलग कर लिया। अब सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई 4 अप्रैल को होगी।
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27 फीसदी आरक्षण के खिलाफ हैं याचिकाकर्ता
जबलपुर निवासी छात्रा अशिता दुबे व अन्य की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी उपस्थित हुए थे। जबकि राज्य शासन की तरफ से ओबीसी का पक्ष रखने नियुक्त किए गए विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व विनायक प्रसाद शाह उपस्थित हुए थे। याचिकाकर्ता राज्य में ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी करने के खिलाफ है।
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Updated on:
25 Mar 2022 04:43 pm
Published on:
25 Mar 2022 04:41 pm
