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जबलपुर। सफाई कराने के लिए एक शिक्षा समिति को ठेका देने के मामले में नगर सरकार घिरती नजर आ रही है। वहीं डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की ठप व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को सदन की धारा -30 की विशेष बैठक शुरू होते ही हंगामा हो गया। विपक्ष ने कचरे के ठेके **** कठौंदा में दी गई जमीन को लेकर सत्तापक्ष की जमकर घेराबंदी कर सवालों की बौछार कर रहा। वहीं गुरुवार को भी इसी विषय पर गर्भगृह तक आकर नारेबाजी की गई। कई आरोपों पर सत्तापक्ष चुप्पी साधे नजर आया। विपक्ष ठेका निरस्त करने पर अड़ा रहा। हाईकोर्ट में याचिका और लोकायुक्त में शिकायत करने की चेतावनी दी गई। आखिर में बैठक को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
70 प्रतिशत भुगतान कैसे किया?
पार्षद केवल कृष्ण आहूजा ने डोर टू डोर ठेके का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 4 माह से उनके वार्ड में एक गाड़ी नहीं आई है। कचरे के ढेर लगे हैं। घर-घर कचरा उठ नहीं रहा तो 70 प्रतिशत भुगतान कैसे किया जा रहा है। क्या सफाई के लिए धरने में बैठना पड़ेगा। डोर टू डोर की मनमानी कब तक चलेगी।
ठेका पहले, एग्रीमेंट बाद में
राज्यसभा सांसद प्रतिनिधि पूर्व पार्षद अन्नू सिंह ने कहा कि 2 अक्टूबर 16 से डोर टू डोर का कार्य प्रारंभ करा दिया गया, जबकि एग्रीमेंट 17 नवंबर 16 को किया गया। असंवैधानिक तरीके के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। निगम की रिपोर्ट ही बता रही कि 40 प्रतिशत घरों से ही कचरा उठ रहा, फिर 70 प्रतिशत भुगतान कैसे हो रहा है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई न होने की स्थिति में वे इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे। उन्होंने कई सवाल दागे जिसका जवाब सत्तापक्ष नहीं दे पाया।
100 के स्टाम्प पर करोड़ों की जमीन
पूर्व नेता प्रतिपक्ष विनय सक्सेना ने कहा कि अधिकारी एस्सेल कंपनी के आगे घुटनाटेक हैं। कठौंदा की करोड़ों की जमीन कंपनी को प्लांट लगाने के लिए 100 रुपए के स्टाम्प पर दे दी गई। इसके लिए सदन की अनुमति तक नहीं ली गई। इसे लेकर पंजीयक ने भी पत्र लिखकर गंभीर सवाल खड़ा किया है। भू-भाटक की राशि तक नहीं ली गई। शासन को लाखों रुपए की क्षति पहुंचाई गई। इसी कंपनी को डोर टू डोर का ठेका भी सुनियोजित तरीके से दे दिया गया।
टर्मिनेशन नोटिस तैयार, फैसला लें
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए निगमायुक्त वेदप्रकाश ने सदन को यह जानकारी दी कि एस्सेल कंपनी का ठेका टर्मिनेट करने का नोटिस तैयार कर लिया गया है। इसकी जानकारी कंपनी को देते हुए कुछ दिन की मोहलत और दी गई है। 2 महीने से कोई भुगतान भी नहीं किया गया है। कचरा कलेक्शन का सिस्टम फेल होने में कंपनी के मैनेजमेंट की गलतियां जिम्मेदार रही हैं, जिन्हें अब वे सुधार रहे हैं। निगमायुक्त ने कहा कि सदन व एमआईसी इस मामले में जो फैसला लेगी, उसी अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
कचरा कंपनी पूरी तरह फेल हो गई है। न संसाधन हैं, न वाहनों के रजिस्ट्रेशन कराए गए हैं। भौतिक सत्यापन कराने में भी अफसरों का पसीना **** रहा। सिर्फ नोटिस-नोटिस खेला जा रहा है।
- राजेश सोनकर, नेता प्रतिपक्ष
मेरे अपने वार्ड में ही कचरे का जगह-जगह अंबार लगा है। बुधवार को वार्ड की जनता ने मुझे घेर लिया था। कचरा कंपनी का ठेका तत्काल निरस्त कर दिया जाना चाहिए।
- ताहिर अली, पार्षद
यदि नगर निगम के स्वास्थ्य प्रभारी से सफाई की व्यवस्था संभाली नहीं जा रही तो उन्हें तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए। कचरा कंपनी को तत्काल ब्लैक लिस्टेड किया जाए।
- संजय राठौड़, पार्षद
नगर निगम के अधिकारियों से छोटे-छोटे कामों के लिए भीख मांगने जैसा निवेदन करना पड़ता है। इसके बाद भी काम नहीं होते। निगम में राष्ट्रपति शासन लगवा लेना चाहिए।
- विनोद चौधरी, पार्षद
Published on:
04 Aug 2017 02:20 pm
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