सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा किसी भी प्रकरण को आदेश के बावजूद लिस्ट नहीं करने के कई कारण होते हैं। जानबूझकर या दुर्भावनावश ऐसा नहीं किया जा रहा। हाईकोर्ट में साढ़े चार लाख से अधिक प्रकरण लम्बित हैं। ऐसे में अधिवक्ता की ओर से मांग किए जाने पर यथार्थ रूप से प्रत्येक मामले को लिस्ट नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इस तरह तो कोई मामला सूचीबद्ध होता है और अधिवक्ता हाजिर नहीं होता, तो उसे भी अवमानना मानना चाहिए। इस मत के साथ कोर्ट ने अवमानना याचिका खारिज कर दी।