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जबलपुर। केंद्रीय बजट को जबलपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने उद्योग एवं व्यापार जगत के लिए नाकाफी बताया है। सदर स्थित इंडस्ट्री के कार्यालय में सोमवार को बजट परिचर्चा में हर पहलू पर चर्चा की गई। कहा गया कि एमएसएमई क्षेत्र के लिए बड़ा फंड नहीं दिया गया। उपभोक्ताओं के लिए ऐसे प्रावधान नहीं किए गए जिससे कि उसकी खर्च करने की शक्ति बढ़े। चेम्बर के चेयरमेन प्रेम दुबे ने कहा कि अर्थव्यवस्था को मंदी से उबारने तथा उद्योग-व्यापार जगत को इस बजट से काफ ी अपेक्षाएं थी जो कि पूरी नहीं हुईं। एमएसएमई के विकास के लिए बजटीय प्रावधान नाकाफी हैं। वरिष्ठ उपाध्यक्ष हिमांशु खरे ने बताया कि देश में स्थापित किए जाने वाले मेगा टैक्सटाइल पार्क में जबलपुर को भी रखा जाना चाहिए। पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन के क्षेत्र में बजटीय प्रावधान बढ़ाया है, इससे जबलपुर में भी इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं प्रबल हुई हैं।
कर विशेषज्ञ अभिषेक ध्यानी ने बताया कि सरकार का राजकोषीय घाटा इस बार ज्यादा रहने के बावजूद किसी प्रकार का अतिरिक्त कोविड सेस नहीं लगाया गया जो स्वागत योग्य है। आयकर में छूट की आस पूरी नहीं हुई। सचिव नरिंदर सिंह पांधे ने बताया कि डीजल-पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाने की पुरानी मांग को बजट में अनदेखा किया गया है जिससे ट्रांसपोर्ट व्यवसाइयों में निराशा है। इन पर एक्साइज डयूटी कम की जाती तो इसका फ ायदा सभी को मिलता। अमरप्रीत छाबड़ा ने बताया कि महाकोशल व जबलपुर क्षेत्र में पर्यटन की असीम संभावनाओं को देखते हुए बजट से अपेक्षाएं थी जो कि पूर्ण होती नहीं दिख रही हैं। विशेष कौशल विकास केंद्रों को आरंभ करना स्वागत योग्य है जिससे होटल एवं पर्यटन व्यवसाय से जुड़े उद्योग व सेवा लाभांवित होंगे। परिचर्चा में राधेश्याम अग्रवाल, पंकज माहेश्वरी, मनोज सेठ, शिशिर नेमा, दीपक सेठी, अनिल अग्रवाल, शशिकांत पांडेय, मनु तिवारी, इन्द्र कुमार सोनी आदि उपस्थित थे।
Updated on:
02 Feb 2021 08:36 pm
Published on:
02 Feb 2021 08:36 pm
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