
zaika india ka Poha Jalebi
जबलपुर। वैसे तो खाने पीने के मामले पूरी दुनिया में भारत का कोई जवाब नहीं है। देश की विविधताएं देखते ही बनती है। खान-पान हर 1 किलोमीटर के बाद बदल जाता है। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर की बात करें तो यहां पर पोहा जलेबी पूरे देश में फेमस है। यहां का जो स्वाद है वह जलेबी का स्वाद कहीं और नहीं मिलता। पोहा की बात की जाए तो इसकी खपत जितनी जबलपुर में होती है उतनी शायद ही किसी शहर में होती हो।
जबलपुर का सुबह का फेवरेट नाश्ता पोहा जलेबी माना जाता है। दमोह नाका बड़ा फुहारा अधारताल गढ़ा और रांझी की कुछ एक होटल में तो केवल पोहा जलेबी के लिए ही चलती हैं। यहां का पोहा जलेबी खाना यानी दिन को हैप्पी बनाने जैसा है। जलेबी के लिए दमोह नाका में सबसे फेमस किशन होटल जिनके यहां जलेबी की खबर अंदाजा लगाया जा सकता है कि बनने के पहले लोग खाने वाले खड़े रहते हैं। यहां की इमरती भी फेमस है।
सुबह सादी जलेबी, शाम को खोवा और इमरती
अंकित अग्रवाल ने बताया कि सुबह 7 बजे होटल खुलती है, जिसमें पोहा के साथ मैदा की सादी जलेबियां ग्राहकों को दी जाती हैं। सुबह नाश्ता करने वालों की भीड़ इतनी होती है कि जलेबियां बनते ही खत्म हो जाती हैं। वहीं शाम को खोवा और इमरती बनाई जाती है। इसके लिए दोपहर 2 बजे से ही तैयारियां शुरू करनी पड़ती हैं, तब कहीं जाकर शाम 4 बजे खोवा की जलेबी और इमरती बनना शुरू होती है।
लोगों ने शुरू की एडवांस बुकिंग
अंकित अग्रवाल ने बताया कि होटल 40 साल पहले उनके पापा ने शुरू की थी। कुछ ही सालों में उनके हाथों की जलेबियां, खासकर इमरती व खोवा की जलेबी लोगों को खूब पसंद आने लगी। रोजाना जितनी भी जलेबी बनाई जाती हैं, वे तत्काल बिक जाती हैं। ऐसे में जलेबियों के शौकीनों ने शाम को बिना इंतजार किए जलेबी पाने के लिए एडवांस देना शुरू कर दिया। अब आधे से ज्यादा जलेबियों की सुबह ही एडवांस बुकिंग हो जाती है।
शुद्ध खोवा, विशेष कारीगर
अंकित ने बताया कि खोवा की जलेबी में शुद्ध एवं गुणवत्ता वाला खोवा उपयोग किया जाता है। इसके लिए हर दिन खोवा लाया जाता है। साथ ही खोवा की जलेबी बनाने के लिए विशेष हलवाई रखा गया है, जिसे पापा किशन अग्रवाल द्वारा अपना हुनर दिया गया है। ताकि ग्राहकों को किसी प्रकार की कोई शिकायत न रह जाए। वहीं स्वाद के लिए कुछ विशेष सामग्री भी डाली जाती है, जो केवल हमें पता है। इसी तरह इमरती के लिए उपयोग होने वाली दाल भी अच्छी क्वालिटी की होती है। जो रोज दोपहर को होटल में खुद ही पीसी जाती है।
नहीं बढ़ाई संख्या
होटल में जलेबियां, समोसा , कचौड़ी व आलूबड़ा ही बनाया जाता है। लोगों ने अन्य मिठाइयां बनाने कहा, लेकिन ग्राहकों की पसंद को देखते हुए 40 साल से आज तक होटल का स्वरूप और स्वाद दोनों नहीं बदला है।
Published on:
28 Nov 2017 03:16 pm
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