
बारिश में निखरी बस्तर की खूबसूरती (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Chhattisgarh Tourism: बारिश के बाद बस्तर के जलप्रपातों की कल-कल और जंगलों की हरियाली पर्यटकों को अपनी ओर खींचने लगी है। अब त्योहारी सीजन में बस्तर का पर्यटन कारोबार रफ्तार पकड़ने की तैयारी में है। नवरात्र, बस्तर दशहरा और दीपावली के दौरान पर्यटकों की बड़ी आमद की उम्मीद को देखते हुए शहर के होटल और रिसॉर्ट संचालकों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। कई होटल-रिसॉर्ट में अक्टूबर और नवंबर की तारीखों के लिए एडवांस बुकिंग भी शुरू हो गई है।
बस्तर की पहचान अब केवल जंगल और जलप्रपातों तक सीमित नहीं है। गुफाएं, वन्यजीवन, प्राचीन मंदिर, आदिवासी संस्कृति, लोक कला, हस्तशिल्प और बस्तर दशहरा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। बारिश के मौसम में चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे जलप्रपातों का सौंदर्य चरम पर होने से मानसून के साथ ही पर्यटन सीजन शुरू हो जाता है।
पर्यटन कारोबारियों के मुताबिक, पर्यटकों की संख्या बढ़ना बस्तर के लिए अच्छा संकेत है, लेकिन इसके साथ सुविधाओं का विस्तार भी जरूरी होगा। होटल और रिसॉर्ट के साथ पार्किंग, स्वच्छता, स्थानीय परिवहन, भोजन, प्रशिक्षित गाइड और पर्यटन स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं की मांग बढ़ेगी।
बस्तर आने वाले पर्यटकों की सूची में चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात और कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान सबसे ऊपर हैं। इसके अलावा कुटुमसर और कैलाश गुफाएं, दलपत सागर, बस्तर पैलेस, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प और आदिवासी जीवनशैली भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। पर्यटन क्षेत्र में इस बार तीरथगढ़ में बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्षों से बंद पर्यटन विभाग के मोटल को 30 वर्ष की लीज पर निजी संस्था को सौंपे जाने के बाद इसके दोबारा शुरू होने की उम्मीद है। इससे पर्यटन स्थल के नजदीक ठहरने की सुविधा मिलेगी। स्थानीय पर्यटन कारोबार, रोजगार और छोटे व्यवसायों को भी इसका फायदा मिलने की संभावना है।
नक्सल समस्या में आई कमी के बाद बस्तर में पर्यटन की संभावनाएं पहले की तुलना में मजबूत हुई हैं। शांत माहौल से पर्यटकों के साथ निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है। केंद्र सरकार ने भी छत्तीसगढ़ में पर्यटन अधोसंरचना के लिए 448 करोड़ रुपए की सहायता का उल्लेख किया है। ऐसे में आने वाले समय में बस्तर को इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
करीब 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा देश के अन्य दशहरा आयोजनों से अलग अपनी आदिवासी परंपराओं और धार्मिक-सांस्कृतिक अनुष्ठानों के लिए जाना जाता है। अक्टूबर में यहां आने वाले पर्यटकों के लिए प्राकृतिक पर्यटन के साथ बस्तर की संस्कृति और परंपराएं भी बड़ा आकर्षण रहेंगी। इसके बाद दीपावली तक पर्यटन गतिविधियां जारी रहने की उम्मीद है।
शकील रिजवी, गाइड व होम-स्टे संचालक के अनुसार, “पर्यटक अब सिर्फ होटल में कमरा लेकर लौटना नहीं चाहते। वे स्थानीय जीवनशैली और संस्कृति को करीब से महसूस करना चाहते हैं। खासकर युवा और विदेशी पर्यटक प्राकृतिक वातावरण में स्थानीय भोजन और ग्रामीण परिवेश का अनुभव लेना पसंद कर रहे हैं। त्योहारों के दौरान बुकिंग बढ़ने की उम्मीद है।”
Updated on:
28 Aug 2026 04:46 pm
Published on:
28 Aug 2026 04:46 pm
