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आमचो बस्तर: केवीके मिलेट्स कैफे का इडली-डोसा खूब भा रहा, अब देशभर में बढ़ी रागी, कोदो-कुटकी की डिमांड

Ragi, Kodo-Kutki Millets : डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद साबित हो रही बस्तर की रागी, कोदो व कुटकी(Kutki) की देश भर से मांग आ रही है। डिमांड बढ़ने से फसल परिवर्तन कर बस्तरिया किसान अब इन मिलेट्स(Millets) की खेती कर रहे हैं।
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केवीके मिलेट्स कैफे

रागी, कोदो-कुटकी

Ragi, Kodo-Kutki Millets : डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद साबित हो रही बस्तर की रागी, कोदो व कुटकी की देश भर से मांग आ रही है। डिमांड बढ़ने से फसल परिवर्तन कर बस्तरिया किसान अब इन मिलेट्स की खेती कर रहे हैं। बता दें कि जगदलपुर(Jagdalpur) स्थित कृषि विज्ञान केंद्र(Krishi Vigyan Kendra) के मिलेट्स कैफे (Millets Cafe)का इडली-डोसा खूब पसंद किया जा रहा है।

राज्य सरकार ने भी इसे प्रोत्साहित करते हुए समर्थन मूल्य बढ़ा दिया है। इसके बाद इस साल बस्तर(Bastar)जिले में इसका रकबा बढ़ाकर 1200 एकड़ कर दिया गया। जबकि बीते साल इसकी खेती 800 एकड़ में ही थी। दूसरी ओर प्रदेश सरकार ने इसका समर्थन मूल्य 3177 रुपए से बढ़ाकर 3577 रुपए कर दिया है। इसके चलते इसकी लोगों का रुझान इसमें बढ़ा है।

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इन गुणकारी तत्वों से भरपूर हैं ये मिलेट्स
कोदो-कुटकी(Kodo-Kutki) बंजर जमीन में होती है। इसे खाद-पानी की जरूरत नहीं पड़ती। इसके दाने में 8.3 प्रतिशत प्रोटीन, 1.4 प्रतिशत वसा तथा 65.9 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट(carbohydrates) पाया जाता है। कोदो-कुटकी डायबिटीज, यकृत (गुर्दों) और मूत्राशय के लिए लाभकारी है। रागी में अमीनो अम्ल मेथोनाइन पाया जाता है, जो स्टार्च की प्रधानता वाले भोज्य पदार्थों में नहीं पाया जाता। प्रति 100 ग्राम रागी में 7.3 ग्राम प्रोटीन, 1.3 ग्राम वसा, 72 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 2.7 ग्राम खनिज होता है जो इसे पौष्टिक बनाता है।

कोदो, कुटकी व रागी की नई किस्मों की मांग
अमित मुखर्जी ने कहा, कृषि विज्ञान केंद्र व शहीद गुंडाधूर कृषि महाविद्यालय(Shaheed Gundadhur Agriculture College) और अनुसंधान केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक यहां विकसित की गई सीजी कोदो-3, सोनकुटकी और सीजी रागी-3 वैरायटी के बीजों की मांग ओडिशा, आंध्रप्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, असम, मध्य प्रदेश, तमिलनाड़ु में है।