
CG News: पुलिस भर्ती में शारीरिक दक्षता परीक्षा के नाम पर मापदंडों के खिलाफ माहारा समाज ने अपनी आवाज बुलंद की है। समाज ने बस्तर कमिश्नर और बस्तर आईजी को ज्ञापन सौंपकर अनुसूचित जाति के लिए पूर्व में लागू मापदंडों के बहाल करने की मांग की है।
माहरा समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि केन्द्र सरकार ने 14 अगस्त 2023 को उन्हें आरक्षण का लाभ प्रदान किया था। वर्ष 2028 तक पुलिस भर्ती में अनुसूचित जाति के लिए शरीरिक दक्षता का मापदंड अनुसूचित जनजाति के समान था, लेकिन हाल के बदलावों के बाद इसे सामान्य वर्ग के बराबर कर दिया गया है। इस बदलाव ने समाज के युवाओं के लिए पुलिस सेवा में प्रवेश के अवसर सीमित कर दिए हैं।
ज्ञापन सौंपने के दौरान माहरा समाज के संभागीय अध्यक्ष राजू बघेल, संरक्षक सोनाराम बघेल, संयोजक राजेन्द्र बघेल, उपाध्यक्ष भुवनेश्वर नाग, बस्तर जिला अध्यक्ष कन्हैया सोना और अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे। समाज के नेताओं ने इस मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
CG News: माहराज समाज का कहना हैै कि यह नया नियम समाज के युवओं के भविष्य के साथ अन्यया है। उनका मानना है कि यह परिवर्तन युवाओं के सपनों को कुचलने वाला है। समाज ने जोर देकर कहा कि वर्ष 2028 तक लागू मापदंड को फिर से लागू किया जाना चाहिए, ताकि उनके युवाओं को भी पुलिस सेवा में अपना कैरियर बनाने का अवसर मिल सके।
माहरा समाज ने पुलिस भर्ती प्रक्रिया में सुधार करते हुए कहा है कि यह उनके युवाओं के साथ न्याय और समाज उत्थान के लिए बेहद जरुरी है। उन्होने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन का रुख भी अपना सकते हैं। समाज के इस कदम से पुलिस भर्ती के मापदंडों में बदलाव की बहस एक बार फिर से जोड़ पकड़ सकती है।
Published on:
22 Nov 2024 03:29 pm

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