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आखिर ऐसा क्या बहाना बनाया पार्षदों ने घूमने का.. आप भी जानिए

उत्सव समिति की बैठक में इस बिंदु को किया शामिल
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जयपुर

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Veejay Chaudhary

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Updated: 27 Jun 2018, 1:20 PM IST

jaipur

आखिर ऐसा क्या बहाना बनाया पार्षदों ने घूमने का.. आप भी जानिए

जयपुर. शहर के जन प्रतिनिधियों का हाल देखिए, नगर निगम में संस्कृति समिति में शामिल पार्षदों ने अभी तो काम ही ठीक से नहीं संभाला और हिमाचल प्रदेश घूमने जाने की जुगत लगाने लगे हैं। इसके लिए समिति की 28 जून को होने वाली बैठक के एजेंडे में यह जुगतभरा बिन्दु शामिल करने पर अड़े हैं। पार्षदों ने तर्क दिया है कि दूसरे राज्यों की संस्कृति समझना जरूरी है। वे हिमाचल प्रदेश जाएंगे और वहां की संस्कृति को समझेंगे।

सांस्कृतिक उत्सव एवं जन कल्याण समिति की गुरुवार को होने वाली बैठक में विभिन्न बिन्दुओं के साथ इस मसले पर भी चर्चा होगी। बैठक में समिति सदस्यों सहित निगम के वित्तीय सलाहकार, सभी उपायुक्त व अधिशासी अभियंता (मुख्यालय) को भी बुलाया गया है।
सच यह है

समिति की नई कार्यकारिणी राजस्थान की संस्कृति तो पहले से समझती है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों को प्रदेश की संस्कृति से जोडऩे के लिए उसने अब तक कुछ नहीं किया। सीधे हिमाचल प्रदेश के भ्रमण का प्रस्ताव रख दिया।

इन भी होगी चर्चा
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा
- जयपुर समारोह 2018 के कार्यक्रम
- जयपुर समारोह व अन्य कार्यक्रमों के लिए बजट आवंटन


सूरत सहित इन पर भी हो चुकी चर्चा
भ्रमण का प्लान पहले से ही तैयार किया जा रहा है। इसमें विभिन्न निकायों के निरीक्षण के लिए सभी पार्षदों को भेजने का मसौदा बनाने का काम शुरू हुआ था। इसकी जिम्मेदारी अपरोक्ष रूप से उपमहापौर मनोज भारद्वाज को सौंपी गई थी। पार्षदों को सूरत, गोआ, हैदराबाद, मैसूर, इंदौर आदि भेजने पर मंथन किया गया।

ये सवाल जो आपके जेहन में उठना स्वाभाविक
सांस्कृतिक समिति का नए सिरे से गठन हुए थोड़ा समय ही हुआ है। अभी तक तो समिति अपनी जिम्मेदारी भी ठीक से नहीं संभाल पाई। शहर की संस्कृति को किस तरह समृद्ध किया जाए, इस पर ही प्लानिंग नहीं हुई।

कोई काम कर दिखाए बिना और ठोस योजना बनाए बिना हिमाचल भ्रमण क्यों?
अब तक ‘घूमने’ गए अफसरों-नेताओं ने लौटकर शहर को क्या नया दिया?
क्या जन प्रतिनिधि की शहर और जनता के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है?
ऐसे दौरे हर बार जनता के खजाने से ही क्यों?
महापौर इसकी पुख्ता मॉनिटरिंग क्यों नहीं कर रहे कि उनका ‘मंत्रीमण्डल’ सही दिशा में काम कर रहा है या नहीं?
महापौर पहले उन्हें अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाने के लिए प्रेरित क्यों नहीं कर रहे?