अशोक गहलोत ने लिखा कि सोचिए, जो व्यक्ति करोड़ों रुपए खर्च कर मेयर-चेयरमैन बनेगा, वह जनता की सेवा करेगा या अपनी लगाई पूंजी वसूलने में जुटेगा? जितनी बड़ी रिश्वत उतनी ही बड़ी वसूली और वह वसूली होगी जनता के लिए बनने वाली सड़कों, पट्टों, नालियों और हर छोटे-बड़े काम की फाइल से। अगले पांच साल जनता को अपने ही शहर में हर काम के लिए बड़ी रिश्वत देनी पड़ेगी। यह सिर्फ भाजपा की राजनीति नहीं, आपकी जेब पर सीधा डाका है। जनता को अब जागना होगा, वरना यह लूट आपके दरवाजे तक पहुंचनी तय है।