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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रोटोकॉल में चूक, कर्मचारी को हटाया

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ( loksabha speaker om birla ) के 21 जुलाई को कोटा प्रवास के दौरान प्रोटोकॉल में चिकित्सा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है।
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जयपुर

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Nidhi Mishra

•

Jul 27, 2019

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

जयपुर/ कोटा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ( loksabha speaker om birla ) के 21 जुलाई को कोटा प्रवास के दौरान प्रोटोकॉल में चिकित्सा विभाग ( health department ) की बड़ी लापरवाही सामने आई है। मामला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। हुआ यों कि सीएमएचओ आॅफिस ( kota cmho ) से लोकसभा अध्यक्ष के प्रोटोकॉल में लगाई गई 108 एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची। आनन—फानन में एमबीएस प्रशासन ने चिकित्सकों की टीम के साथ ओमनी एंबुलेंस को स्टेशन भेजा। प्रोटोकॉल में 108 एंबुलेंस देर से भेजने को लापरवाही मानते हुए एमबीएम अधीक्षक ने सीएमएचओ को पत्र जारी कर संबंधित कार्मिक के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की। चिकित्सा विभाग ने 108 एंबुलेंस संचालक कंपनी जीडीकेएमआरआई को कारण बताओ नोटिस दिया। एंबुलेंस कर्मचारी को सेवा से हटा दिया।

वहीं लोकसभा में एक बिल पर चर्चा के दौरान लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि संसद ब्रिटिश काल के कानूनों को बदलने का प्रयास करे। रिपीलिंग एंड अमेडिंग बिल, 2019 को पेश किए जाने के दौरान स्पीकर ने कहा कि लोकसभा के सभी सांसद पुराने और अप्रचलित कानूनों को बदलने पर विचार करें। पश्चिम बंगाल के सेरामपोर से तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि ब्रिटिश काल से पहले के कानूनों की बजाय सरकार को अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए कानूनों को बदलने की कोशिश करनी चाहिए, जैसे कि भारतीय दंड संहिता। बनर्जी ने कहा कि कई बदलाव हुए हैं, इसलिए नए कानून बनाने की जरूरत है। इस पर बिरला ने कहा कि संसद को ब्रिटिश जमाने के कानून को नए कानून बनाकर खत्म करना चाहिए। स्पीकर लोकसभा के कार्यवाही में कई तरह के बदलाव कर रहे हैं।

स्पीकर ने इस निचले सदन में अनुशासन पर कई बार चर्चा की है। मौजूदा अध्यक्ष ने यह भी कोशिश की है कि लोकसभा का समय कम जाया हो। बिरला जब से लोकसभा के स्पीकर बने हैं, तब से सदन की कार्यवाही बहुत ही कम प्रभावित हुई है। इस दौरान लोकसभा में हंगामों और उसकी वजह से कार्यवाही के स्थगित होने में कमी आई है। बिरला ने यह भी सुनिश्चित किया है कि वह ज्यादा से ज्यादा समय तक सदन की अध्यक्षता करें, न कि उपाध्यक्ष या अन्य वरिष्ठ सांसदों के लिए यह जिम्मेदारी छोड़ें। बिरला सदन की कार्यवाही के संचालन में हिंदी का भी प्रमुखता से इस्तेमाल करते हैं।