
फाइल फोटो- पत्रिका
जयपुर। जिले की एससी-एसटी मामलों की विशेष अदालत ने फोन पर गाली-गलौज करने और जातिसूचक शब्द कहने के आरोप में आरोपी डॉ. मदन कलवानिया को बड़ी राहत दी है। अदालत ने मामले में आरोपी को एससी-एसटी एक्ट, आईपीसी और आईटी एक्ट के तहत लगाए गए आरोपों से डिस्चार्ज कर दिया। अदालत ने माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि कथित अपमान सार्वजनिक स्थान पर या अन्य लोगों की मौजूदगी में किया गया था।
जयपुर की विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि एससी-एसटी एक्ट के तहत लगाए गए आरोपों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि कथित अपमान या जातिसूचक टिप्पणी सार्वजनिक रूप से हुई हो। इस मामले में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया, जिससे यह स्थापित हो कि आरोपी ने पीड़ित को लोगों की उपस्थिति में गालियां दीं या उसका सार्वजनिक तौर पर अपमान किया।
आरोपी के अधिवक्ता संदीप लुहाड़िया के अनुसार, अदालत ने आईटी एक्ट से जुड़े आरोपों पर भी विचार किया। सुनवाई के दौरान ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया कि आरोपी ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से कोई अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री भेजी, प्रकाशित की या प्रसारित की थी। वहीं, पीड़ित ने खुद स्वीकार किया कि मोबाइल पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग उसने अन्य लोगों को सुनाई और उसे प्रचारित-प्रसारित किया था।
शिकायत के अनुसार, मामला कोविड महामारी के दौरान 28 मार्च 2020 का है। उस समय शिकायतकर्ता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात था। आरोप था कि इसी दौरान आरोपी डॉक्टर ने उसके मोबाइल पर फोन किया और बातचीत के दौरान गाली-गलौज करते हुए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इससे उसे अपमानित महसूस हुआ। बाद में उसने मोबाइल बातचीत की रिकॉर्डिंग अन्य लोगों को सुनाई।
Updated on:
29 Aug 2026 09:03 pm
Published on:
29 Aug 2026 09:03 pm
