
बारिश के दौरान की तस्वीर (फाइल फोटो-पत्रिका)
जयपुर। राजस्थान में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है, लेकिन यह राहत ज्यादा लंबी रहने वाली नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में सितंबर के पहले सप्ताह के दौरान एक नया वेदर सिस्टम विकसित होने की संभावना है। इसके प्रभाव से राजस्थान में एक बार फिर मानसूनी गतिविधियां जोर पकड़ सकती हैं। अनुमान है कि 4-5 सितंबर के आसपास प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है।
मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ने से प्रदेश के कई इलाकों में उमस और गर्मी बढ़ गई है। शुक्रवार को राजस्थान में बारिश का दौर लगभग पूरी तरह थमा रहा। तेज धूप के कारण जयपुर, टोंक, अलवर समेत करीब 15 शहरों में दिन का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया। श्रीगंगानगर में गर्मी का असर सबसे ज्यादा रहा और तापमान 40 डिग्री के करीब पहुंच गया।
मौसम विभाग के मुताबिक फिलहाल मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर दिशा में खिसकी हुई है। यह अमृतसर, देहरादून और लखीमपुर खीरी होते हुए बंगाल की खाड़ी तक सक्रिय है। ट्रफ के सामान्य स्थिति में वापस आने के साथ ही राजस्थान में मानसून की गतिविधियों में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
अगले करीब एक सप्ताह के दौरान बीकानेर, जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, जयपुर, भरतपुर और कोटा संभाग के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने की संभावना जताई गई है। इस दौरान तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव के साथ गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर सकती है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार सितंबर के शुरुआती दिनों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाला सिस्टम राजस्थान के मौसम में बड़ा बदलाव ला सकता है। इसके असर से पूर्वी और उत्तरी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। 4-5 सितंबर के बाद प्रदेश के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज बारिश भी देखने को मिल सकती है।
इस बीच शुक्रवार को जयपुर, उदयपुर, कोटा, भरतपुर, अजमेर और जोधपुर संभाग के ज्यादातर इलाकों में दिनभर मौसम साफ रहा। बारिश थमने के साथ धूप तेज रही और कई स्थानों पर तापमान में एक से दो डिग्री तक बदलाव दर्ज किया गया।
मानसून के ब्रेक के बीच प्रदेश के उन जिलों की चिंता अभी भी बनी हुई है, जहां इस सीजन में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई है। जयपुर सहित कई जिलों में बारिश की कमी के कारण सूखे जैसे हालात की स्थिति बनी हुई है। पाली में इस साल बारिश का आंकड़ा सबसे कम रहा है, जबकि जालोर, बांसवाड़ा, जैसलमेर और उदयपुर भी कम बारिश वाले प्रमुख जिलों में शामिल हैं।
ऐसे में सितंबर के पहले सप्ताह में अनुमानित बारिश का नया दौर किसानों और आम लोगों के लिए राहत लेकर आ सकता है। हालांकि, बारिश की तीव्रता और इसका दायरा आने वाले दिनों में बनने वाले वेदर सिस्टम की स्थिति पर निर्भर करेगा।
Updated on:
29 Aug 2026 06:32 pm
Published on:
29 Aug 2026 06:32 pm
