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Chambal Sanctuary: देश में पहली बार शुरू हुआ ‘घड़ियाल संरक्षण अभियान’, पालीघाट बनेगा नया इको-टूरिज्म जोन

Wildlife Awareness: चम्बल में घड़ियालों की घर वापसी: 10 नन्हे घड़ियाल प्राकृतिक आवास में छोड़े गए।

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जयपुर

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Rajesh Dixit

Nov 13, 2025

Gharial Conservation: जयपुर. देश में पहली बार घड़ियाल संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। प्रदेश के वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री संजय शर्मा ने सवाई माधोपुर जिले के राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य, पालीघाट में घड़ियालों के संरक्षण के तहत 10 नन्हे घड़ियालों को चम्बल नदी में उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा। इनकी उम्र लगभग 5 माह है और लंबाई अब 75 सेंटीमीटर तक पहुंच चुकी है। वन विभाग ने “रियरिंग फास्ट ट्रैक-हेड स्टार्टिंग कार्यक्रम” शुरू किया है।

इस कार्यक्रम के तहत चम्बल किनारे मादा घड़ियाल द्वारा दिए गए अंडों से निकले बच्चों को सुरक्षित वातावरण में पाला गया। शुरुआत में जब इनकी लंबाई मात्र 25 सेंटीमीटर थी, तब इन्हें अलग-अलग केबिन में रखकर प्राकृतिक आहार जैसे जीवित मछलियां दी गईं ताकि उनमें प्राकृतिक शिकार करने की आदत बनी रहे। इन 30 में से 10 घड़ियालों को अब नदी में छोड़ा गया है जबकि शेष को आगामी कुछ दिनों में छोड़ा जाएगा।

राज्यमंत्री शर्मा ने चम्बल अभयारण्य का निरीक्षण करते हुए घड़ियालों के कृत्रिम प्रजनन, वैज्ञानिक रियरिंग तकनीकों और संरक्षण उपायों की सराहना की। उन्होंने कहा कि चम्बल नदी प्रदेश की पारिस्थितिकी का प्रमुख आधार है और इसे “घड़ियाल हॉटस्पॉट” के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही, पालीघाट और चम्बल तट को “इको-टूरिज्म जोन” के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिल सके।

उन्होंने कहा कि चम्बल क्षेत्र न केवल घड़ियालों की धरती बन रहा है, बल्कि यह पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता का भी सशक्त उदाहरण बनेगा। इस अनूठी पहल से भारत में घड़ियालों के अस्तित्व को नई मजबूती मिलेगी और संरक्षण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।