
CJP leaders Abhijit Dipke, Ashutosh Ranka and late Amayra - File PICS
जयपुर के सबसे चर्चित मामलों में से एक, 9 वर्षीय मासूम बच्ची अमायरा की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के को-कन्वीनर आशुतोष रांका ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक विस्तृत और भावुक पोस्ट शेयर की है। इसमें राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार, जयपुर पुलिस और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवालों की बौछार की है। रांका ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिस्टम आम आदमी को किस तरह तड़पाता है और उसका उत्पीड़न करता है, इसे समझना है तो अमायरा केस को फॉलो करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को टैग करते हुए चेतावनी दी कि अमायरा का परिवार इस लड़ाई में अकेला नहीं है और पूरा देश इस मामले पर नजर बनाए हुए है।
जयपुर के मानसरोवर स्थित नीरजा मोदी स्कूल में हुई इस दर्दनाक घटना को बीते 10 महीने से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन पीड़ित परिवार आज भी अदालतों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। CJP ने अमायरा के माता-पिता विजय और शिवानी से किए गए अपने वादे को दोहराते हुए साफ कर दिया है कि जब तक इस केस में प्रिंसिपल और जिम्मेदार स्कूल प्रशासन के खिलाफ सख्त धाराओं में कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह लड़ाई सड़क से लेकर कानूनी मंचों तक पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगी।
आशुतोष रांका ने अपनी पोस्ट में अमायरा की यादों को साझा करते हुए लिखा कि वह महज 9 साल की होनहार और हंसती-खेलती बच्ची थी। वह अपने स्कूल में बेस्ट ऑलराउंडर थी, जो पढ़ाई के साथ-साथ डांस और म्यूजिक में भी हमेशा चैंपियन रहती थी। हालांकि, स्कूल में उसकी ही क्लास के कुछ बच्चे उसे लगातार परेशान और बुली कर रहे थे।
1 नवंबर 2025 के दिन क्लास में सहपाठियों द्वारा तंग किए जाने पर अमायरा अपनी क्लास टीचर के पास एक-दो बार नहीं बल्कि 5 बार शिकायत करने गई। आरोप है कि उस दौरान क्लास टीचर अपने मोबाइल फोन में व्यस्त थी और दूसरी पीरियड टीचर क्लास में मौजूद ही नहीं थी। मानसिक रूप से बेहद परेशान दिख रही बच्ची जब चुपचाप क्लास से बाहर निकली, तो किसी भी शिक्षक या गार्ड ने उसे रोकने या पूछने की जहमत नहीं उठाई। अपमान न सह पाने के कारण मासूम बच्ची भागती हुई स्कूल की चौथी मंजिल पर गई और वहां से छलांग लगा दी।
CJP के को-कन्वीनर ने आरोप लगाया कि इस दर्दनाक हादसे के तुरंत बाद नीरजा मोदी स्कूल प्रशासन ने झाड़ू-पोंछा लगवाकर मौके से खून के सारे धब्बे मिटा दिए और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को भी गायब करने की कोशिश की गई। पुलिस को भी शुरुआती दौर में गुमराह किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने जांच बिठाई और सुरक्षा मानकों में भारी खामियां पाए जाने पर स्कूल की 9वीं से 12वीं तक की मान्यता रद्द कर दी थी। हालांकि, बाद में स्कूल ने कानूनी दांव-पेंच और बड़े वकीलों का सहारा लेकर उच्च न्यायालय से सीबीएसई के इस आदेश पर स्टे हासिल कर लिया।
आशुतोष रांका ने राज्य सरकार के शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी प्रहार किया और कहा कि 18 मार्च 2026 को जब सीबीएसई के आदेश पर हाईकोर्ट से रोक मिली, तो उसी दिन राजस्थान शिक्षा विभाग ने सीबीएसई के आदेश को कॉपी-पेस्ट करके अपना आदेश निकाला, जिसमें सुरक्षा संबंधी कमियों का जिक्र था। लेकिन महज कुछ ही दिनों बाद 2 अप्रैल 2026 को सरकारी वकीलों ने अदालत में खुद बयान देकर अपने ही उस आदेश को वापस ले लिया या रोक दिया।
इसके अलावा, पुलिस जांच पर भी गंभीर उंगलियां उठाई गई हैं। CJP का आरोप है कि पुलिस द्वारा अदालत में जो आरोप पत्र दाखिल किया गया, उसमें भारतीय न्याय संहिता की सही और सख्त धाराएं ही नहीं जोड़ी गईं। इसके चलते मजिस्ट्रेट कोर्ट ने परिजनों की शिकायत के बावजूद सभी आरोपियों को आसानी से जमानत दे दी। वर्तमान में पीड़ित परिवार सेशंस कोर्ट में निष्पक्ष धाराओं और दोबारा जांच की अर्जी लगाकर तारीख पर तारीख भुगतने को मजबूर है।
अपने विस्तृत बयान के अंत में आशुतोष रांका ने सह-कार्यकर्ता अभिजीत दीपके के साथ मिलकर अमायरा के माता-पिता से किए गए वादे का जिक्र किया। उन्होंने लिखा, "अगर सिस्टम को लगता है कि वह अमायरा के माता-पिता को ऐसे ही तड़पा सकता है, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल होगी। आज का भारत जंतर-मंतर के बाद का भारत है, जहां जनता अब अपने हक के लिए गिड़गिड़ाएगी नहीं बल्कि सिस्टम की अकड़ को उखाड़ फेंकेगी।"
उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सीधी अपील करते हुए कहा कि अमायरा सिर्फ एक परिवार की नहीं बल्कि पूरे देश की बच्ची है। 10 महीने बीत जाने के बाद भी स्कूल की प्रिंसिपल और मुख्य जिम्मेदार बिना किसी डर के बाहर घूम रहे हैं, जिससे सुरक्षा मानकों में कोई सुधार नहीं हुआ है। CJP ने सरकार से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तुरंत न्याय दिया जाए और दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
Updated on:
8 Sep 2026, 11:40 AM IST
Published on:
8 Sep 2026, 11:40 AM IST
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