
अभिजीत दीपके (File Pic) और आशुतोष रांका से मारपीट की तस्वीरें
राजस्थान की राजधानी जयपुर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शीर्ष नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के लिए सुरक्षा और राजनीतिक स्वीकार्यता एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। पहले जून 2026 में जयपुर के शहीद स्मारक पर एक सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को भीड़ के बीच सरेआम थप्पड़ मारे गए थे और अब अगस्त 2026 में पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका और उनकी टीम को जयपुर के रामपुरा कंवरपुरा में ग्रामीणों व स्थानीय लोगों के भारी विरोध और हाथापाई का सामना करना पड़ा है। जयपुर में सीजेपी के बड़े चेहरों पर एक के बाद एक हुए इन हमलों ने राजस्थान की सियासत में हलचल तेज कर दी है।
पहले अभिजीत दीपके का 'थप्पड़ कांड' और अब आशुतोष रांका की 'पिटाई' व खदेड़े जाने की इस ताजा घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जयपुर सीजेपी की जमीनी राजनीति और अभियानों के लिए सबसे कठिन और विवादित मैदान साबित हो रहा है।
सीजेपी के 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत शुक्रवार सुबह पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका और उनकी टीम जयपुर के बगरू विधानसभा क्षेत्र में आने वाले रामपुरा कंवरपुरा गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय का जायजा लेने पहुंचे थे।
सीजेपी कार्यकर्ताओं के पहुंचने पर ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने रास्ते में ही बैरिकेडिंग जैसा माहौल बनाकर उन्हें गांव और स्कूल में दाखिल होने से रोक दिया।
देखते ही देखते माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। ग्रामीणों ने सीजेपी के खिलाफ नारेबाजी की और कार्यकर्ताओं के साथ तीखी नोकझोंक व हाथापाई करते हुए उन्हें मौके से दौड़ा-दौड़ाकर खदेड़ दिया।
आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि यह सरकारी स्कूल सालों से तबेले और भैंसों के बीच चल रहा है। जब उनकी टीम इसे उजागर करने पहुंची, तो वहां विरोध शुरू करा दिया गया।
घटना के तुरंत बाद आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर बयान और वीडियो जारी कर सत्ताधारी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। रांका ने कहा, "रामपुरा कंवरपुरा में विरोध करने वाले सामान्य ग्रामीण नहीं थे, बल्कि वे भाजपा द्वारा भेजे गए गुंडे थे। स्थानीय भू-माफिया और राजनीतिक लोग बच्चों को भैंसों के तबेले में पढ़ाने पर मजबूर कर रहे हैं। जब हमने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की नाकामी उजागर करने की कोशिश की, तो हम पर हमले करवाए गए। सरकार अपनी कमियां छिपाने के लिए तानाशाही पर उतर आई है।"
मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने सीजेपी के इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि वे अपने गांव के स्कूल का इस्तेमाल किसी भी पार्टी को राजनीतिक पब्लिसिटी के लिए नहीं करने देंगे।
ग्रामीणों का दावा है कि राज्य सरकार ने स्कूल भवन के जीर्णोद्धार के लिए 12 लाख रुपये का बजट पहले ही मंजूर कर दिया है। ग्रामीणों ने कहा कि जैसे उन्होंने गांव में मंदिर बनाया है, वैसे ही वे स्कूल भी ठीक करा लेंगे। उन्हें किसी बाहरी राजनीतिक दल के निरीक्षण की जरूरत नहीं है।
जयपुर में सीजेपी नेताओं पर हमले की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले जून 2026 में नीट (NEET) पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ जयपुर के शहीद स्मारक पर प्रदर्शन के दौरान सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को कंधों पर उठाए जाने के दौरान भीड़ में से कुछ युवकों ने लगातार कई थप्पड़ जड़ दिए थे। उस दौरान भी पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लिया था।
राजस्थान सरकार द्वारा हाल ही में सरकारी स्कूलों में बिना प्रिंसिपल की अनुमति के बाहरी लोगों के प्रवेश और वीडियोग्राफी पर लगाए गए बैन के बाद सीजेपी और प्रशासन के बीच टकराव और बढ़ गया है। 'अभिजीत दीपके थप्पड़ कांड' और अब 'आशुतोष रांका की पिटाई व झड़प' ने साबित कर दिया है कि जयपुर में सीजेपी का राजनीतिक सफर बेहद संघर्षपूर्ण और हिंसक मोड़ ले रहा है।
Updated on:
21 Aug 2026 11:45 am
Published on:
21 Aug 2026 11:33 am
