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नोटबंदी एक महाघोटाला, समय पर उजागर होगा: राहुल गांधी

पत्रिका से विशेष साक्षात्कार में राहुल ने कहा कि नोटबंदी पूरी तरह देशविरोधी कदम था। उन्होंने कहा कि नोटबंदी का फैसला ऐसा था जिससे देश के आर्थिक ढांचे को आघात पहुंचा।
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rahul gandhi

भुवनेश जैन
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का दावा है कि केंद्र ने नोटबंदी का कदम सोची-समझी चाल के अंतर्गत उठाया था। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य कालाधनधारकों का कालाधन सफेद करना था। उन्होंने कहा, दरअसल नोटबंदी एक महाघोटाला है, जो समय के साथ उजागर होगा।

शुक्रवार को यहां तुगलक लेन स्थित अपने निवास पर पत्रिका से विशेष साक्षात्कार में राहुल ने कहा कि नोटबंदी पूरी तरह देशविरोधी कदम था। उन्होंने कहा कि नोटबंदी का फैसला ऐसा था जिससे देश के आर्थिक ढांचे को आघात पहुंचा। इस साक्षात्कार में उन्होंने विधानसभा चुनाव, किसान असंतोष, बेरोजगारी, मंदिरों के दर्शन, विनम्रता व हिंदू धर्म, राजस्थान के लिए प्राथमिकताएं आदि पर सवालों के विस्तार से जवाब दिए। प्रस्तुत हैं साक्षात्कार के प्रमुख अंश -

नोटबंदी और जीएसटी के क्रियान्वयन से देश का आर्थिक वातावरण काफी प्रभावित हुआ है। खासतौर से छोटे कारोबारी चार साल बाद भी परेशानी से उबर नहीं पा रहे। कांग्रेस के पास क्या समाधान है?
राहुल - दरअसल मोदी सरकार में देश की वित्तीय प्रणाली 15-20 प्रभावशाली लोगों के हितों का संरक्षण कर रही है। छोटे और मंझले व्यापारियों का इस प्रणाली में प्रवेश ही नहीं हो पा रहा। बैंकिंग से लेकर वित्तीय संस्थानों तक की यही हालत है। मोदी जी-अरुण जेटली के बनाए तंत्र में सिर्फ कुछ उद्योगपति मित्रों को प्रवेश व लाभ ही संभव है। राजनीतिक पहुंच व संरक्षण के अभाव में मध्यम व छोटे व्यापारी टैक्स टेररिज़्म से परेशान हैं। कांग्रेस सत्ता में आई तो 'गब्बर सिंह' टैक्स की 5 सतहों को मिलाकर एक से दो सतहों तक सरलीकरण करेंगे। साथ-साथ दर्जनों जीएसटी फॉर्म भरने की अनिवार्यता व पूरी प्रणाली में आ रही मुश्किलों का हम हल निकालेंगे।

तो नोटबंदी अर्थव्यवस्था पर प्रहार और घोटाला कैसे हुआ?
नोटबंदी एक सुनियोजित षडयंत्रकारी महाघोटाला था। नोटबंदी से अर्थव्यवस्था को तीन लाख करोड़ की चपत लगी। दुकानदार, मंझले व छोटे व्यवसायी तथा असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों लोगों का धंधा चौपट हो गया। एक तरफ तो बैंकों की लाइनों में लोग दर-दर की ठोकरें खा रहे थे और 150 से अधिक लोगों की जान चली गई, दूसरी तरफ कमीशनखोरी पर चोर दरवाजे से पुराने नोटों को नए नोटों में बदलने का खेल सरकार की सहमति से चलता रहा। अब आरटीआइ ने बताया है कि केवल अहमदाबाद जिले के को-ऑपरेटिव बैंक में, जिसके डायरेक्टर भाजपा अध्यक्ष, अमित शाह हैं, नोटबंदी के 5 दिनों में देश में सबसे अधिक 700 करोड़ से ज्यादा पुराने नोट जमा हुए। यही स्थिति भाजपा नेताओं द्वारा चलाए जा रहे अनेक जिला बैंकों में भी निकली। नोटबंदी से ठीक पहले बैंकों में 5 लाख करोड़ से अधिक जमा हुए। क्या इस पैसे की जाँच हुई। नोटबंदी की सच्चाई आहिस्ता-आहिस्ता निकलेगी और पता चलेगा कि यह एक महाघोटाला था।

जिन 5 राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, वहां करीब 40 प्रतिशत वोटर युवा हैं। आज हर प्रदेश में युवा बेरोजगारी से त्रस्त हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी युवाओं को मुद्रा व अन्य योजनाओं से रोजगार देने की बात कर रहे हैं। क्या वास्तव में ऐसा हुआ है? इससे निपटने के लिए आपका रोडमैप क्या है?
देखिए, जब भी कोई राष्ट्रीय समस्या आती है, वह अचानक नहीं आती। कई वर्ष पूर्व उसकी आहट सुनाई देने लग जाती है। भारत में रोजगार का जबरदस्त संकट सामने खड़ा है। चीन में भी जब ऐसा संकट आया तो उसने पूरी दुनिया के लिए मैन्युफैक्चरिंग का काम शुरू कर खुद को दुनिया की फैक्ट्री बना लिया। हमें चीन की चुनौती को स्वीकार कर उनसे बेहतर मैनुफै क्चरिंग हब बनना है, तभी रोजगार पैदा होंगे। मेरी पहली शिकायत है कि रोजगार का भयावह संकट सामने खड़ा है, परंतु हमारी सरकार सोई पड़ी है। वह बेरोजगारी को राष्ट्रीय समस्या तथा चुनौती के रूप में स्वीकार ही नहीं कर रहे।

और दूसरी शिकायत?
दूसरी यह है संकट से निपटने के लिए ढांचागत तैयारी नहीं है। समस्या को स्वीकार कर हल निकालना होगा। जैसे हरितक्रांति लाकर खाद्यान्न संकट से निपटे थे व श्वेत क्रांति लाकर दूध की कमी से। यदि चीन का एक शहर अपने मैटल उद्योग को ताला निर्माण में बदल रोजगार की राहें खोल सकता है, तो राजस्थान का हैंडीक्राफ्ट उद्योग, जेम्स एण्ड ज्वेलरी उद्योग, ऑटो उद्योग, कपड़ा उद्योग, बाजरा-ग्वार आदि एग्रो-उद्योग से हजारों-लाखों नए रोजगारों का सृजन क्यों नहीं कर सकती? शर्त केवल यह है कि सरकार मददगार बने, न कि स्पीड ब्रेकर।

हम देख रहे हैं कि किसान अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर आ रहे हैं। मुम्बई और दिल्ली में बड़े मार्च हो चुके हैं। भाजपा नीत सरकार का दावा है कि पिछले चार वर्षों में किसानों के लिए बहुत काम हुए। फिर यह असंतोष क्यों?
दरअसल मोदी सरकार की सोच और रास्ता मूलभूत तौर से कृषि और किसान विरोधी है। मोदी जी सत्ता में आए किसान की लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफे का वादा कर, पर कोरी बातों के अलावा किया कुछ नहीं। आज हजारों लाखों किसान दिल्ली सहित पूरे देश में सड़कों पर हैं। अगर मोदी और वसुंधरा सरकारें किसान को कर्जमुक्ति व फसल की पूरी कीमत नहीं दे सकती, तो उन्हें सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं। इसके विपरीत भाजपा नेता कहते हैं कि भारतीय किसान गेहूं और गन्ना लाभदायक तरीके से नहीं पैदा कर सकते तो उन्हें इनकी खेती छोड़ देनी चाहिए। इनका बाहर से आयात किया जा सकता है। आजकल किसान विरोधी बयानबाजी फैशनेबल हो गई है। परंतु सच्चाई यह है कि हिंदुस्तान की नींव खाद्य सुरक्षा है। और आप उसे नकार नहीं सकते। यह अंतर है किसान की जरूरत और भाजपा सरकार की सोच में।

कांग्रेस उनकी समस्याओं का क्या हल देखती है?
सबसे पहले किसानों का सम्मान कीजिए, उनका दर्द समझिए व उनका खोया आत्मविश्वास लौटाईये। अगर मोदी जी मुट्ठीभर उद्योगपतियों का 3,17,000 करोड़ माफ कर सकते हैं, तो राजस्थान के 5 करोड़ किसानों तथा देश के 62 करोड़ किसानों को कर्जराहत क्यों नहीं दे सकते? सरकार के इस किसान विरोधी रवैये से किसानों को लगने लगा है कि सरकार को उनकी मेहनत की जरूरत नहीं। जब किसान के साथ न्याय होगा, अन्नदाता के रूप में उनका सम्मान होगा, तभी उनका आत्मविश्वास लौटेगा। दूसरे, कृषि की पूरी प्रणाली में सुधार करना होगा तथा खेत से खाने की मेज तक सीधे उपज लाने तथा उचित कीमत देने का इंतजाम करना होगा। तीसरे, फसल बीमा योजना हो या भावांतर जैसी योजनाएं, सब भ्रष्टाचार व मुनाफाखोरी की भेंट चढ़ गई हैं। रोजगार, किसान, और खेत की प्रोडक्टिविटी- तीनों एक दूसरे से जुड़े हैं। मोदी सरकार इस लिंकेज़ को नहीं पहचानती। किसान के बेटों को रोजगार चाहिए, उन्नति चाहिए, यही बेसिक समस्या है। अगर छोटी होती खेत की जोतों से किसान के बेटा-बेटी अपना पेट नहीं पाल पाएंगे, तो सरकार की जिम्मेदारी है कि एक तरफ तो फसल की पूरी कीमत दे, दूसरी तरफ किसान व खेत मजदूर परिवारों के लिए रोजी रोटी के नए रास्ते खोले। यही ग्रामीण क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती है, जिसे मोदी जी ने दरकिनार कर दिया है।

बीजेपी के लोग बार-बार कहते हैं कि कांग्रेस बिना दूल्हे की बारात है, मतलब कौन मुख्यमंत्री होगा, पता नहीं? ऐसा क्यों?
यूपी व हरियाणा में जब चुनाव हुआ, तो बीजेपी का दूल्हा कौन था? झारखंड में कौन था, बीजेपी वाले बताएं? बीजेपी हर बार जो तर्क देती है, उसमें खुद के लिए एक मापदंड व दूसरों के लिए बिल्कुल अलग मापदंड। राजस्थान में सबको मालूम है कि कांग्रेस के मुख्य लीडर कौन हैं। उनमें अशोक गहलोत जी हैं, सचिन पायलट हैं, डूडी हैं, जोशी जी हैं, व कई और। हम तरुणाई व तजुर्बे का कॉम्बिनेशन बनाकर चुनाव लड़ रहे हैं। हमारे लिए चुनाव एक मजबूत व तरक्कीशील राजस्थान के नए सिरे से निर्माण का है। यही हमारी ताकत है।

टिकटों के समय कांग्रेस एक अलग उठान पर थी। क्या आप मानते हैं कि स्पष्ट नेतृत्व के अभाव में राजस्थान में कांग्रेस की परफॉर्मेंस पर असर पड़ेगा?
राजस्थान में कांग्रेस के नेतृत्व के पास युवा जोश भी है और प्रशासन का लंबा तजुर्बा भी। यह हमारा इतिहास भी है और भविष्य के राजस्थान की कल्पना भी। मगर भाजपा के मुख्यमंत्री पद की कैंडिडेट ही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी हैं। यह भाजपा भी जानती है। उनका कुशासन व अहंकार ही उनकी हार का कारण बनेगा।

अगर राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनेगी, तो आपकी क्या प्राथमिकता होंगी?
सबसे पहले प्रदेश में न्याय का शासन होगा। किसान, दुकानदार, युवा, दलितों, पिछड़ों, महिलाओं, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों व 7 करोड़ राजस्थानियों को यह विश्वास देंगे कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार उनकी अपनी सरकार है। किसान का कर्ज माफ होगा, युवाओं के लिए रोजगार का इंतजाम, व्यापारियों को टैक्स के जंजाल से मुक्ति, स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में नई शुरुआत, महिला सुरक्षा हो या सामाजिक सुरक्षा चक्र को सुदृढ़ करने की जिम्मेदारी, यह हमारी सरकार के लक्ष्य होंगे। राजस्थान के पास बहुत ताकत है - टूरिज़्म, हैंडीक्राफ्ट, सीमेंट उद्योग, जेम्स एण्ड ज्वेलरी, आईटी, ऑटो, एग्रो इंडस्ट्रीज़ - इन सबके अलग-अलग क्लस्टर्स को विकसित करना है। स्वास्थ्य और शिक्षा में मिनिमम गारंटी युवाओं के लिए हो। पब्लिक एजुकेशन सिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता है। यही स्थिति सरकारी अस्पतालों की है। निजी क्षेत्र की संस्थाएं रहें, परंतु प्रदेश के गरीब और साधारण लोगों के पास यह विकल्प हो कि सरकारी संस्थान भी निजी संस्थानों से कम न हों। अर्बन प्लानिंग की एक संपूर्ण व्यवस्था हो और मेट्रो जैसे सालों से पेंडिंग प्रोजेक्ट्स सीमित समय में पूरे हों। सिंचाई हो या पीने का पानी, उसका व्यापक इंतजाम हो। राजस्थान की कांग्रेस सरकार जनता के दर्द को समझे और उसका हल निकाले।