पानी बंटवारे पर राजस्थान और एमपी सीएम में ठनी, कमलनाथ की आपत्ति पर, गहलोत ने दिलाई समझौते की याद

पानी बंटवारे पर राजस्थान और एमपी सीएम में ठनी, कमलनाथ की आपत्ति पर, गहलोत ने दिलाई समझौते की याद

Pushpendra Singh Shekhawat | Updated: 15 Sep 2019, 07:30:00 AM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

पानी बंटवारा विवाद : 37 हजार करोड़ के ईस्टर्न कैनाल प्रोजेक्ट का विवाद राजस्थान व मध्यप्रदेश मुख्यमंत्रियों के बीच पहुंचा, पानी हिस्से को लेकर मध्यप्रदेश सरकार की है आपत्ति, गहलोत ने अन्तर्राज्यीय समझौते व राज्य में पानी की कमी का दिया हवाला

भवनेश गुप्ता / जयपुर। Rajasthan के महत्वपूर्ण ईस्टर्न कैनाल प्रोजेक्ट ( Eastern Canal Project ) में पानी बंटवारे का विवाद राजस्थान और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों तक पहुंच गया है। मध्यप्रदेश सरकार के आपत्ति जताने के बाद अब राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ( CM Ashok Gehlot ) ने सीएम कमलनाथ ( CM Kamalnath ) को चिठ्ठी लिख राज्य के हक का पानी देने के लिए कहा है। इसमें स्पष्ट लिखा है कि मध्यप्रदेश शासन के आरोप अनुकूल नहीं है, इसलिए पुनर्विचार की जरूरत है। अन्तर्राज्यीय नियंत्रण मण्डल की बैठक में बनी सहमति की भी याद दिला दी। उधर, इस घटनाक्रम के बीच सांसद रामचरण बोहरा ( Ramcharan Bohra ) ने भी प्रोजेक्ट की जरूरत को लेकर जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ( Gajendra Singh Shekhawat ) से बात की है।

37 हजार करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट से राजस्थान के 13 जिलों तक पेयजल पहुंचाना है, जिससे लाखों लोगों को फायदा होगा। यहां तक की रामगढ़ सहित कई बांध इसी से पुनर्जीवित होने हैं। गौरतलब है कि गहलोत बजट में इसे नेशनल प्रोजेक्ट का दर्जा देने की जरूरत जता चुके हैं।

दिलाई अन्तर्राज्यीय नियंत्रण मण्डल में सहमति की याद..
मध्यप्रदेश-राजस्थान अन्तर्राज्यीय नियंत्रण मण्डल की 13वीं बैठक हुई। इसमें दोनों राज्यों ने अपने—अपने जल ग्रहण क्षेत्र में उपलब्ध पानी और दूसरे राज्य के जल ग्रहण क्षेत्र से उपलब्ध 10 प्रतिशत पानी को उपयोग में लेने के लिए सहमति दी थी। इसके बाद ही पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) में पानी का आकलन किया और जल उपलब्धता के प्रावधान किए गए।

इस तरह बताया सुलभ
प्रोजेक्ट में मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों के कैचमेंट क्षेत्र के अधिशेष पानी की आवक की गणना 75 प्रतिशत डिपेन्डेबिलिटी पर की गई है। इस आधार पर 3393 क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध होगा। यह प्रोजेक्ट में प्रस्तावित डायवर्जन जल मात्रा के करीब ही है।


यह है मामला
राजस्थान सरकार एमपी से आने वाले कुन्नू, पार्वती, कालीसिंध नदी से 50 प्रतिशत डावर्जन पर पानी लेना चाह रही है, जबकि मध्यप्रदेश सरकार ने 75 प्रतिशत पर ले जाने के लिए कह दिया। ऐसा हुआ तो राजस्थान में अपेक्षित पानी की मात्रा करीब आधी हो जाएगी। जल संसाधन विभाग ने इस आपत्ति पर सवाल उठाते हुए केन्द्रीय जल आयोग से इसे खारिज करने के लिए कह चुका है।

इन नदियों से यहां आना है पानी
मानसून के दौरान कुन्नू, कुल, पार्वती, कालीसिंध, मेज नदी बेसिनों में आने वाले अतिरिक्त पानी को बनास, मोरेल, बाणगंगा, पार्वती, कालीसिंध व गंभीर नदी बेसिनों में पहुंचाया जाना है।

इन 13 जिलों को फायदा, बांध होने हैं पुनर्जीवित
जयपुर के अलावा झालावाड़, बांरा, कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, अजमेर, टोंक, दौसा, करौली, अलवर, भरतपुर व धौलपुर तक पेयजल पहुंचाना है। इसके जरिए वर्ष 2051 तक पेयजल की उपलब्धता का दावा। जयपुर के रामगढ़ सहित अन्य बांध को पुनर्जीवित करना है।

सिंचाई से लेकर इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर तक
-26 बड़ी व मध्यम सिंचाई परियोजना तक पानी पहुंचेगा, जिसमें 0.8 लाख हैक्टेयर मौजूदा सिंचित क्षेत्र को सीधा फायदा।

-5 जिलों में 2 लाख हैक्टेयर नए सिंचित क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी।

-उद्योगों और दिल्ली-मुंबई इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर के लिए 286.4 मिलियन घन मीटर पानी का प्रावधान।

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