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भामाशाह की भावना से खिलवाड़, विधा के मंदिर पर लटकी तलवार

शिक्षा के लिए दान की गई भूमि पर अस्पताल बनवाने की मांग।
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जयपुर

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Teekam Saini

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Updated: 20 Nov 2017, 11:25 PM IST

Education status is bad

करणसर (जयपुर). ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की स्थिति बेहद खराब है। विधालय में कहीं शिक्षक, कहीं भवन तो मैदान का अभाव है। यही स्थिति हरसौली मोड़ स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विधालय की थी। ऐसे में एक महिला भामाशाह आगे आई और उन्होंने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 7 बीघा 2 बिस्वा भूमि स्कूल के लिए दान कर दी, लेकिन अब कुछ ग्रामीण ही इस भूमि को अस्पताल के लिए लेना चाहते हैं। ऐसे में स्कूल भूमि पर दूसरे प्रयोजन के लिए दबाव बनाना भामाशाह की भावना से खिलवाड़ करना है। जानकारी अनुसार श्रीमन्नालाल विजयवर्गीय राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विधालय की स्थापना प्राथमिक स्कूल के रूप में 1950 में हुई थी। यह विधालय 3 अगस्त 1968 को उच्च प्राथमिक, 19 अक्टूबर 2004 को माध्यमिक तथा 7 जून 2013 को उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत हुआ। समय के साथ विधालय की कक्षाओं में तो बढ़ोत्तरी होती गई, लेकिन भवन व संसाधनों की ओर किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। ऐसे में गांव की सरस्वती देवी शर्मा ने अपने पास जो कुछ जमा पूंजी थी वो गांव पर 'लुटा' दी, ताकि गांव के बालक बालिकाओं को शिक्षा मिल सके। सरस्वती देवी ने विधालय विकास के लिए 5 नवम्बर 1996 को 7 बीघा 2 बिस्वा भूमि दे दी। आज इसी भूमि पर यह विधालय भवन खड़ा है, जहां गांव के बालक-बालिकाएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि सरस्वती देवी के पास सैकड़ों बीघा भूमि हो, इनके पास यही भूमि थी, जो इन्होंने शिक्षा के लिए दे दी। इनके 7 बेटियां है, जिनकी शादी कोई बहुत सम्पन्न परिवार में नहीं हुई। ऐसे में सरस्वती देवी चाहती तो इस भूमि को बेचकर अच्छा लाभ पा सकती थी, लेकिन इन्होंने शिक्षा को पैसे से बड़ा मानकर ग्रामीण बच्चों को सौगात दी।

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हर बालिका को मिले शिक्षा
गौरतलब है कि 28 जून 1999 को तत्कालीन राज्य सरकार ने भामाशाह सरस्वती देवी को राज्यस्तरीय भामाशाह सम्मान से नवाजा था। तब उन्होंने कहा था कि मुझे ऐसे सम्मान की जरूरत नहीं थी, मेरी इच्छा यही है कि गांव की हर बालिका को शिक्षा मिले तथा उसे गांव से दूर जाने की जरूरत न रहे।

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दोहित्र ने भी भेजा ज्ञापन
स्कूल के लिए भूमि दान देने वाली भामाशाह सरस्वती देवी के दोहित्र कालाडेरा निवासी शिक्षक पुरुषोत्तम चौबे ने भी 4 अगस्त 2017 को प्रशासनिक व शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को ज्ञापन भेजकर भूमि को शिक्षा के अलावा अन्य विभाग के लिए उपयोग में नहीं लेने की मांग की है।

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अस्पताल के लिए मांग रहे जमीन
इधर, गांव के ही कुछ लोग स्कूल की इस भूमि से चिकित्सालय भवन निर्माण के लिए भूमि आवंटित करने को लेकर अड़े हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि दोनों ओर सड़क होने से चिकित्सालय के लिए यह जगह अच्छी साबित होगी।