
जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए टिकट पर घमासान तय (Photo-Patrika)
जयपुर. नगर निगम चुनाव में पार्टियों के लिए टिकट बांटना जितनी बड़ी चुनौती है, उससे मुश्किल काम टिकट कटने के बाद अपने ही दावेदारों को संभालना होगा। भाजपा और कांग्रेस में 150 वार्डों के लिए उम्मीदवार चयन अंतिम दौर में हैं। एक-एक वार्ड में कई दावेदार टिकट की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इनमें पूर्व पार्षदों से लेकर संगठन के पुराने कार्यकर्ता और प्रभावशाली सामाजिक चेहरे तक शामिल हैं।
दोनों प्रमुख दलों को इस बात का अहसास है कि टिकट की सूची जारी होते ही नाराजगी का दौर चलेगा। 40 से अधिक वार्ड ऐसे माने जा रहे हैं। जहां टिकट से वंचित मजबूत दावेदार निर्दलीय मैदान में उतरकर अधिकृत प्रत्याशी का चुनावी गणित बिगाड़ सकते हैं। पिछले निकाय चुनाव में दोनों नगर निगम में 24 निर्दलीय पार्षद जीतकर आए थे। टिकट की दौड़ में शामिल कई दावेदारों ने विकल्प खुले रखे हैं। किसी ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी की है तो कोई दूसरे दल से संपर्क में है। कुछ दावेदार ऐसे भी हैं, जो टिकट नहीं मिलने के बाद पार्टी में रहकर ही अपने समर्थक प्रत्याशी को मजबूत करने की रणनीति बना सकते हैं। दावेदार टिकट पर नजर बनाए हुए हैं।
टिकट वितरण के दौरान दोनों दलों के पदाधिकारी सिर्फ प्रत्याशी की जीत की संभावना नहीं देख रहे, बल्कि यह भी गणित लगा रहे हैं कि नाराज कार्यकर्ता किस स्तर तक नुकसान पहुंचा सकता है। संगठन में पकड़, पिछला चुनाव प्रदर्शन, व्यक्तिगत वोट बैंक, सामाजिक समीकरण और क्षेत्र में सक्रियता के आधार पर संभावित बागियों का आकलन किया जा रहा है।
पिछले निकाय चुनाव की बात करें तो हेरिटेज नगर निगम और ग्रेटर नगर निगम में 11-11 निर्दलीय पार्षद चुनाव जीते थे। हेरिटेज नगर निगम में तो कांग्रेस का बोर्ड ही निर्दलीयों के दम पर बना था। ग्रेटर नगर निगम में कुछ निर्दलीय पार्षदों को चेयरमैन भी बनाया गया था।
कुछ वार्ड में 40-40 या इससे ज्यादा भी लोग टिकट मांग रहे हैं। ऐसे में दोनों पार्टियों में टिकट वितरण में लगे बड़े नेताओं के माथे पर पसीना आ रहा है।
Updated on:
30 Aug 2026 11:17 am
Published on:
30 Aug 2026 11:17 am
