30 अगस्त 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बड़ी राहत: पत्रिका के खुलासे के बाद राजस्थान के बिजली संयंत्रों को मिला कोयला, कैप्टिव खदानों सहित 22 रैक उपलब्ध

राजस्थान के बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी के बीच अतिरिक्त कोयला आपूर्ति से फिलहाल राहत मिली है। बारिश के कारण कैप्टिव माइंस से कोयले की आपूर्ति आधी रह गई थी। इस कमी को पूरी करने के लिए कोल इंडिया ने अतिरिक्त रैक उपलब्ध कराए है।
2 min read
Google source verification
Rajasthan Power Plants Coal

राजस्थान के बिजली संयंत्रों के लिए मिला अतिरिक्त कोयला। फोटो: पत्रिका

जयपुर। राजस्थान के बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी के बीच अतिरिक्त कोयला आपूर्ति से फिलहाल राहत मिली है। बारिश के कारण कैप्टिव माइंस से कोयले की आपूर्ति आधी रह गई थी। सामान्य दिनों में इन खदानों से रोजाना 14 से 15 रैक कोयला मिलता था, जो बारिश के बाद औसतन 7 रैंक रह गया। इस कमी को पूरी करने के लिए कोल इंडिया ने अतिरिक्त रैक उपलब्ध कराए है।

28 अगस्त की आधी रात तक प्रदेश के लिए कुल 22 रैक कोयला लोड हुआ। इनमें 11 रैंक अतिरिक्त कोयला था, जबकि 11 रैंक कैप्टिव माइंस से आया। राजस्थान के बिजली संयंत्रों में रोजाना करीब 22 से 23 रैंक कोयले की खपत है। यानी 28 अगस्त की आपूर्ति लगभग दैनिक जरूरत के बराबर रही। इस दिन डेडिकेटेड कोल बेस्ड स्टॉक 27.082 मिलियन टन दर्ज किया गया। कोयले की प्राप्ति 2.149 मिलियन टन और खपत 2.358 मिलियन टन रही।

दो कंपनियों से भेजा 5-5 टन कोयला

कैप्टिव माइंस से कम आपूर्ति को देखते हुए कोल इंडिया लिमिटेड ने 21 अगस्त को प्रदेश की जरूरत पूरी करने के लिए वेस्टर्न कोलफील्ड्स लि. और महानदी कोलफील्ड्स लि. से 5-5 लाख टन अतिरिक्त कोयला आवंटित किया। इसके बाद दोनों कंपनियों की खदानों से राजस्थान के लिए अतिरिक्त रैंक भेजे जाने लगे।

कर रहे नियमित निगरानी

कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव संजीव कुमार कस्सी ने बताया कि कोयला मंत्रालय देश के सभी बिजलीघरों में कोयला आपूर्ति की नियमित निगरानी कर रहा है। राजस्थान को कैप्टिव माइंस के अलावा अन्य खदानों से भी अतिरिक्त कोयला आवंटित किया है।

पत्रिका ने उठाया मुद्दा

पत्रिका ने 6 व 29 अगस्त को बिजली घरों में कोयले की कमी का मुद्दा उठाया था। जिसमें बताया ​गया था कि देश के 190 तापीय बिजलीघरों में से 45 में कोयले का स्टॉक गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। इन प्लांटों में तय आवश्यकता का 25 फीसदी या इससे भी कम कोयला बचा है। राजस्थान के तापीय बिजलीघर भी इस संकट से अछूते नहीं हैं। राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के सात थर्मल पावर प्लांटों में निर्धारित नॉर्मेटिव स्टॉक का औसतन महज 23 फीसदी कोयला बचा है। इनमें पांच प्लांट क्रिटिकल श्रेणी में पहुंच चुके हैं। इसके बाद मंत्रालय ने जरूरत को देखते हुए अतिरिक्त कोयला आवंटित कराने की पहल की।