3 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Jaipur: जवाहर कला केंद्र में IAS निधि चौधरी की पेंटिंग्स का प्रदर्शन, अध्यात्म से लेकर प्रेम के भरे रंग; वन मंत्री ने किया उद्घाटन

देश में 20 से ज्यादा प्रदर्शनियां कर चुकी आईएएस निधि चौधरी की जयपुर में यह पहली प्रदर्शनी है।

2 min read
Google source verification
IAS Nidhi Chaudhary

Photo- Patrika Network

जयपुर। जवाहर कला केंद्र की अलंकार दीर्घा में कला प्रदर्शनी 'चित्रायन: चित्रों की यात्रा' में निधि चौधरी, निकिता तातेड़, परिधि जैन और शगुन अग्रवाल की कला का प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शनी प्रकृति, पौराणिक कथाओं और मानवीय भावनाओं को एक रंगीन कलात्मक बुनावट में पिरोती है, जहां हर कृति आत्मचिंतन, अभिव्यक्ति और दृश्य कथानक का एक अनूठा अनुभव देती है। देश में 20 से ज्यादा प्रदर्शनियां कर चुकी आईएएस निधि चौधरी की जयपुर में यह पहली प्रदर्शनी है। बड़ी संख्या में दर्शक जेकेके पहुंच रहे हैं और पेंटिंग्स का अवलोकन कर रहे हैं। प्रदर्शनी रविवार 31 अगस्त तक चलेगी।

प्रदर्शनी में खास

यहां निधि चौधरी की पेंटिंग्स में केदारनाथ के साथ ही भगवान शिव की अन्य कथाओं की जानकारी लेने के लिए स्कूली बच्चे भी पहुंचे। उन्होंने हर एक पेंटिंग के बारे में विस्तार से जाना। यहां उन्होंने सूफीज्म के बारे में भी सवाल किए। वहीं कपास, मछलिया, स्त्री देह और मन, भगवान जन्नाथ व अन्य अध्यात्म और प्रेम की संवेदनाओं से भरपूर कला प्रदर्शनी को हर किसी ने सराहा। बता दें कि प्रदर्शनी का उद्घाटन वन मंत्री संजय शर्मा ने किया था। इस मौके पर विधायक युनूस खान, अहमदाबाद आईजी विधि चौधरी, गुजरात के आणंद जिला कलक्टर प्रवीण चौधरी भी मौजूद रहे।

राजस्थान से है नाता

कलाकार निधि चौधरी महाराष्ट्र कैडर की आइएएस अधिकारी हैं और मूलतः डीडवाना जिले से हैं। उनकी कलाकृतियां गहन व्यक्तिगत व सृजनात्मक यात्रा को दर्शाती हैं। राजस्थान की निधि चौधरी अभी नेशनल गैलेरी ऑफ मॉडर्न आर्ट मुंबई के निदेशक पद पर कार्यरत हैं। निधि एक उम्दा लोकसेवक होने के साथ-साथ प्रभावी वक्ता, लेखिका भी हैं।

वहीं, निकिता तातेड़ मोज़ेक और मेश पेंटिंग के जरिए सांस्कृतिक विरासत तथा आधुनिक दृष्टिकोण का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है। कलाकार परिधि जैन ने भारत के समकालीन कला परिदृश्य में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वहीं शगुन अग्रवाल अपनी कला से सार्वभौमिक अनुभवों को जोड़ती हैं और दर्शकों को अपनी कृतियों में स्वयं को खोजने का आमंत्रण देती हैं।