
राजस्थान ने नहीं मानी जम्मू—कश्मीर सरकार की, दरखास्त को किया दरकिनार, सीबीआइ को भेजा मामला
ओमप्रकाश शर्मा / जयपुर. गृह विभाग ने फर्जी हथियार लाइसेंस प्रकरण की जांच सीबीआइ से कराने का निर्णय किया है। जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से मिले पत्र के बाद यह कार्रवाई रुकी हुई थी, जिसमें कहा था कि वहां आइपीसी लागू नहीं होती। इस मुद्दे पर विधि विभाग की राय का इंतजार था। गृहमंत्री ने मामला सीबीआइ को भेजने का आदेश दिया है। अब सीबीआइ को इस सम्बंध में पत्र लिखा जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर पर फैले फर्जी हथियार लाइसेंस मामलेका खुलासा एटीएस ने किया था। देश में ऐसा गिरोह सक्रिय है, जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जम्मू-कश्मीर के 4 जिलों से हथियार लाइसेंस बनवाता है, फिर विभिन्न राज्यों में रिन्यू करवा लेता है।
आइएएस का भाई हो चुका गिरफ्तार
एटीएस ने इस मामले में गत सप्ताह ही जम्मू-कश्मीर में तैनात आइएएस अधिकारी के भाई कुमार ज्योति रंजन को गिरफ्तार किया था। एटीएस सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार रंजन का छोटा भाई जम्मू कश्मीर के कूपवाड़ा में कलक्टर लगे थे, तब आरोपी ने फर्जी हथियार लाइसेंस गिरोह से मोटी रकम लेकर राजस्थान सहित कई प्रदेशों के कूपवाड़ा से फर्जी तरीके से हथियार लाइसेंस बनवाए थे। जिला कलक्ट्रेट कार्यालय से हथियार लाइसेंस बनवाने वालों की पुलिस तस्दीक भी नहीं करवाई जाती थी। राजस्थान एटीएस मामले की सीबीआइ जांच चाहती है, इस पर गृह विभाग भी रजामंद था। गत माह जम्मू कश्मीर सरकार का पत्र मिला, जिसमें लिखा था कि भारत का कानून जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं है। वहां भारत की आजादी से पहले ही रणबीर पैनल कोड लागू है। यह कानून यहां के शासक रहे महाराजा रणबीर सिंह के नाम से लागू किया था।
अब लिया निर्णय
जम्मू-कश्मीर के पत्र पर विधि विभाग की राय ली गई। राय आने से पहले ही गृहमंत्री ने सीबीआई को पत्र लिखने का आदेश दिया था। इस बीच विधि विभाग की राय भी आ चुकी है। इस पर गृह विभाग ने कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है।
Published on:
16 Jul 2018 09:49 pm
